Chhattisgarh

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में ऊदबिलाव की मौजूदगी के मिले प्रमाणविश्व ऊदबिलाव दिवस पर वन विभाग और विज्ञान सभा की बड़ी उपलब्धि, कैमरा ट्रैप में कैद हुई दुर्लभ प्रजाति

रायपुर, 26 मई। विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयासों से कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं।

यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ वरुण जैन के सहयोग से संभव हुई है। अधिकारियों के अनुसार यह प्रमाण इस बात का संकेत है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है, जिसे नदियों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।

जानकारी के अनुसार विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें भारत में यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज होना राज्य की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है।

वन विभाग ने बताया कि राज्य में वर्ष 2021 से ऊदबिलाव संरक्षण और शोध कार्य लगातार जारी है। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के जरिए इनके व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है।

वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि अब स्थानीय ग्रामीण और मछुआरे ऊदबिलाव संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचनाएं भी स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही हैं।

विश्व ऊदबिलाव दिवस हर वर्ष 27 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्राकृतिक आवास के नुकसान, जल प्रदूषण, अवैध शिकार तथा जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों के प्रति लोगों को सचेत करना है।

वन विभाग ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें, प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट न फैलाएं तथा जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल विभाग को सूचना दें। विशेषज्ञों का कहना है कि सामुदायिक सहभागिता और स्वच्छ पर्यावरण के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित रखा जा सकता है।

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