PM MODI की अपील का दिखा असर: कथावाचक युवराज पांडे ने घटाया काफिला, जनप्रतिनिधियों से भी की पहल की अपील

गरियाबंद। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा ईरान युद्ध और बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच देशवासियों से की गई संयम और बचत की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कथावाचक Pandit Yuvraj Pandey ने प्रधानमंत्री के संदेश का समर्थन करते हुए अपने काफिले में कटौती कर समाज को सकारात्मक संदेश देने की पहल की है। साथ ही उन्होंने मंत्री, सांसद और विधायकों से भी अपने लंबे काफिलों और अनावश्यक वाहनों के उपयोग में कमी लाने की अपील की है।
गरियाबंद जिले के देवभोग में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में पहुंचने से पहले पंडित युवराज पांडे ने अपने अनुयायियों और समर्थकों के साथ बैठक कर अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे के लिए लंबे वाहन काफिले निकालना उचित नहीं है और आवश्यकता पड़ने पर पैदल या बाइक जैसे वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
उनकी इस अपील का असर कथा स्थल पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जहां पूर्व की तुलना में वाहनों की संख्या काफी कम नजर आई। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे देशहित में सकारात्मक कदम बताया।
पंडित युवराज पांडे ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील केवल आम जनता के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और बड़े पदों पर बैठे लोगों के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “यदि मंत्री, सांसद और विधायक भी अपने काफिलों में कटौती करें और ईंधन की बचत को प्राथमिकता दें, तभी इसका वास्तविक असर समाज में दिखाई देगा। ऊपर से बदलाव शुरू होगा तभी उसका संदेश नीचे तक पहुंचेगा।”
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान देशवासियों से सोना खरीदने में संयम बरतने, विदेश यात्राएं कम करने तथा पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया था।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में ईंधन की बचत देशहित में बेहद आवश्यक है। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान देश ने वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंस और ऑनलाइन बैठकों जैसी व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक अपनाया था, जिन्हें फिर से प्राथमिकता देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2025-26 में भारत का व्यापार घाटा बढ़ने की आशंका है। चीन सहित अन्य देशों से आयात होने वाले सस्ते सामान के कारण यह दबाव और बढ़ रहा है। ऐसे में स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देने और अनावश्यक खर्चों में कटौती से देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार को मजबूती मिल सकती है।




