Chhattisgarh

KORBA BREAKING: CBI ने अब रलिया की जांच शुरू की,महत्वपूर्ण दस्तावेज जप्त

कोरबा,27 अप्रैल 2026। कोयलांचल में पिछले 20 दिनों से मौजूद रहकर जांच की खलबली मचा रही सीबीआई की पड़ताल पूर्ण हो चुकी है। दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव में फर्जी भूविस्थापितों, संपत्ति ना होते हुए भी संपत्ति दर्शा कर मुआवजा के नाम पर किए गए करोड़ों का घोटाला साबित हुआ है। करीब डेढ़ दर्जन लोगों पर आरोप और जिम्मेदारियां तय हुई है जिन पर शीघ्र ही शिकंजा कसेगा। मलगांव मुआवजा घोटाला की जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने अपना रुख गेवरा परियोजना से प्रभावित ग्राम रलिया की ओर कर लिया है। ग्राम रलिया के मुआवजा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सीबीआई अपने साथ ले गई है।
SECL की दीपका परियोजना से प्रभावित ग्राम मलगांव और गेवरा परियोजना प्रभावित ग्राम रलिया में फर्जी भूविस्थापित बनकर फर्जी मुआवजा प्रकरण तैयार करवा कर सांठगांठपूर्वक करोड़ों का मुआवजा हासिल कर लिया गया है। इस मामले में की गई शिकायत पर सीबीआई ने इस बार करीब 20 दिनों तक गेवरा हाउस में ठहर कर अपनी पड़ताल को पूर्ण किया। डीएसपी की अगुवाई में 6 सदस्यीय सीबीआई अधिकारियों के दल और बल की सुरक्षा के साए में मलगांव मुआवजा घोटाला की पड़ताल में करीब 18 लोगों पर आरोप तय होने की जानकारी मिल रही है। इसमें शासन- प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ SECL के भी अधिकारियों और कुछ ग्रामीणों की भूमिका तय होने की बात सामने आई है.

जिनके द्वारा फर्जी मुआवजा पत्रक तैयार करवा कर SECL से करोड़ों का फर्जी मुआवजा हासिल किया गया/ हासिल करने का प्रयास किया गया। मुआवजा का ज्यादा से ज्यादा फर्जी तौर पर लाभ प्रदान करने के लिए पत्रक में भी काफी हेरफेर कराया गया। तत्कालीन एसडीएम से लेकर तहसीलदार, पटवारी, आरआई व अन्य अधिकारी और कर्मियों की भूमिका फर्जीवाड़ा में तय होने का पता चला है। इस दायरे में कोयलांचल के दो चर्चित नाम भी शामिल हैं जो पूरे घोटाला के सूत्रधार होने के साथ-साथ अवैधानिक तरीके से प्रमाणित लाभ भी हासिल किए हुए हैं।

👉🏻 अब रलिया में खलबली

मलगांव की जांच पूरी करने के साथ ही सीबीआई की टीम ने एक दिन पहले कोरबा से रवानगी ले ली। सत्यसंवाद को सूत्र ने बताया कि यहां से जाते-जाते टीम ने ग्राम रलिया में भी हुए मुआवजा घोटाला से जुड़े तमाम तरह के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है।

बताते चलें कि ग्राम रलिया भी फर्जी मुआवजा का हॉटस्पॉट साबित हो रहा है। यहां कालांतर में न सिर्फ फर्जी भूविस्थापित बनकर फर्जी परिसंपत्तियों का निर्माण करा कर कुछ स्थानीय लोगों ने बल्कि सूत्रों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों (जिसमें निरीक्षक व सीईओ स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं) उनके द्वारा अपने रिश्तेदारों/ परिचितों/कर्मचारियों के नाम पर बड़ी-बड़ी जमीनों पर निर्माण करने के साथ ही परिसंपत्तियों को दर्शाकर फर्जी मुआवजा पत्रक के जरिए लाखों-करोड़ों का मुआवजा हासिल किया गया है।

समय-समय पर इस तरह का फर्जीवाड़ा उजागर तो होता रहा लेकिन जांच अब जाकर सीबीआई ने बढ़ाई है। उम्मीद है कि रलिया मुआवजा घोटाला में भी जल्द ही मौके पर निरीक्षण कर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। दूसरी तरफ, दस्तावेज जप्त करने के साथ ही इसमें संलिप्त अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों और फर्जी निवासी बनकर, (जो जाति के लोग इस गांव में रहते ही नहीं, वो भी निवासी बनकर) मुआवजा हासिल करने वालों की धड़कनें तेज हो गई हैं।

Related Articles

Back to top button