कोरबा-प्रताड़ी में अदानी पावर के पावर प्लांट विस्तार के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज़, 27 फ़रवरी को होने वाली जनसुनवाई विवादों के घेरे में

कोरबा, 25 फरवरी – देश के प्रमुख निजी बिजली उत्पादक अदानी पावर लिमिटेड द्वारा कोरबा जिले के प्रताड़ी (Pathadi) में पूर्व में स्थापित लैंको अमरकंटक पावर प्लांट के विस्तार योजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। लैंको अमरकंटक पॉवर प्लांट को अदानी पावर ने अगस्त-सितंबर 2024 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) से मंज़ूरी के बाद अधिग्रहित कर पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था, जिसमें 600 मेगावॉट की मौजूदा क्षमता और आगे बढ़ाने की क्षमता शामिल है।
अधिग्रहण के बाद प्रताड़ी में 2×660 मेगावॉट (कुल 1,320 मेगावॉट) का विस्तार परियोजना (Phase II) Environmental Clearance (पर्यावरण मंज़ूरी) प्रक्रिया के तहत अब पुनः जनसुनवाई के चरण में पहुंच गया है। इसके लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के वेब पोर्टल पर प्रस्ताव के तहत विस्तृत अनुमोदन और जनहित सुनवाई की व्यवस्थित प्रक्रिया निर्धारित की जा चुकी है।
सरकार द्वारा निर्धारित नियमानुसार 27 फ़रवरी को इसी विस्तार परियोजना के लिए जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित होना है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले रोजगार के वादों और सामाजिक लाभों का पूरा नहीं होना, वायु और जल प्रदूषण, जमीन अधिग्रहण के बाद उचित मुआवजा नहीं मिलने जैसी चिंताओं के कारण वह इसके खिलाफ हैं। कई ग्रामवासियों को रोजगार का वादा अभी तक पूरा नहीं किया गया है और इसके लिए वे गुस्से में हैं।
पूर्व विधायक और कांग्रेस के स्थानीय नेता जयसिंह अग्रवाल तथा युवा कांग्रेस ने भी खुलकर परियोजना के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि जनता की राय को सिरे से नजरअंदाज करके जनसुनवाई कराना उचित नहीं है और यह प्रक्रिया भरोसेमंद और निष्पक्ष नहीं हो सकती।
स्थानीय ग्रामीणों की नाराज़गी बढ़ने के कारण प्रशासन और परियोजना समर्थकों के बीच तनाव की स्थिति बन रही है। ग्रामीण संगठन जनसुनवाई रद्द करने और नई नीति के तहत पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभावों पर गंभीर समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
अदानी पावर का पक्ष यह है कि परियोजना से बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और रोजगार के अवसरों में इज़ाफ़ा होगा। कंपनी ने पर्यावरण मानकों का पालन करने तथा नियामक प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ने का आश्वासन दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे बड़े बिजली विस्तार परियोजनाओं में पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इससे पहले इसी कोरबा क्षेत्र में लैंको पावर परियोजना के समय भी स्थानीय विरोध एवं पर्यावरण चिंताओं के चलते 2011 में सार्वजनिक सुनवाई बाधित हो चुकी थी।
अब 27 फ़रवरी को होने वाली जनसुनवाई को लेकर इलाके में हाई अलर्ट है, और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर शामिल पक्षों के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो बड़ी विघटनकारी स्थिति पैदा हो सकती है।



