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5 साल बाद फिर उठाई किताब, बीमारी और शादी के कारण छूटी थी पढ़ाई; दो बच्चों की मां अश्विन्ता ने पास की 10वीं की परीक्षा

धार। मजबूत इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र और परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। मध्यप्रदेश के धार जिले की 26 वर्षीय अश्विन्ता ने इस बात को साबित कर दिखाया है। बीमारी, शादी और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते पांच साल पहले छूटी पढ़ाई को दोबारा शुरू कर उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास कर ली। दो बच्चों की मां अश्विन्ता की यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पातीं।

बीमारी और शादी के कारण छूट गई थी पढ़ाई

अश्विन्ता को बचपन से ही पढ़ाई का शौक था। वर्ष 2019 में जब वे 10वीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तभी अपेंडिक्स का ऑपरेशन होने के कारण उनकी पढ़ाई बीच में छूट गई। इसके बाद कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। कुछ समय बाद शादी हो गई और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते पढ़ाई दोबारा शुरू नहीं कर सकीं।

वर्तमान में अश्विन्ता अपने पति बलराम, सास-ससुर, साढ़े तीन साल की बेटी और छोटे बेटे के साथ रहती हैं। उनके पति मजदूरी करते हैं, जबकि अश्विन्ता घर की किराना दुकान संभालने के साथ सिलाई का काम करती हैं और खेती में भी पति का हाथ बंटाती हैं। इतनी जिम्मेदारियों के बावजूद उनके मन में पढ़ाई पूरी करने की इच्छा बनी रही।

प्रेरक दीदी ने दिखाई शिक्षा की राह

अश्विन्ता की जिंदगी में बदलाव तब आया, जब गांव की प्रेरक दीदी दुर्गा ने उन्हें एजुकेट गर्ल्स के ‘प्रगति कार्यक्रम’ की जानकारी दी। दुर्गा ने उनके सास-ससुर से बातचीत कर उन्हें आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। परिवार की सहमति मिलने के बाद अश्विन्ता ने प्रगति शिविर में पहुंचकर दोबारा पढ़ाई शुरू की।

पढ़ाई के दौरान संस्कृत विषय उनके लिए थोड़ा कठिन रहा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। इस सफर में पति और सास-ससुर का पूरा सहयोग मिला। जब अश्विन्ता पढ़ाई के लिए शिविर जाती थीं, तब उनके पति बलराम घर पर बच्चों की देखभाल करते थे। परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत से आखिरकार उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास कर ली।

अब 12वीं पास करने और सिलाई का काम बढ़ाने का लक्ष्य

10वीं पास करने के बाद अश्विन्ता का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे परिवार के फैसलों में भी खुलकर अपनी राय रखती हैं। उनका मानना है कि हर महिला को शिक्षित होना चाहिए, ताकि वह अपने अधिकारों को समझ सके और आत्मनिर्भर बन सके। वे कहती हैं कि शिक्षा केवल नौकरी पाने के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि खेती-किसानी जैसे कामों को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद करती है।

बचपन में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली अश्विन्ता अब 12वीं की पढ़ाई पूरी करना चाहती हैं। इसके साथ ही वे अपने सिलाई के काम को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें लगता था कि पढ़ाई का अवसर हमेशा के लिए छूट गया है, लेकिन प्रगति कार्यक्रम ने उन्हें दूसरा मौका दिया। अब उनकी सबसे बड़ी इच्छा है कि उनके बच्चों की पढ़ाई कभी न छूटे और वे खुद भी उनके सवालों का जवाब दे सकें।

छूटी हुई पढ़ाई पूरी करने का मौका दे रहा प्रगति कार्यक्रम

एजुकेट गर्ल्स का प्रगति कार्यक्रम उन किशोरियों और युवतियों के लिए शुरू किया गया है, जिनकी पढ़ाई किसी कारणवश बीच में छूट गई है। इस कार्यक्रम के तहत 14 से 29 वर्ष की युवतियों और महिलाओं को ओपन स्कूलिंग के माध्यम से कक्षा 10वीं की परीक्षा पास करने में सहयोग दिया जाता है।

गांवों में आयोजित प्रगति शिविरों में प्रशिक्षित स्वयंसेवक और शिक्षक प्रतिभागियों को पढ़ाई में मदद करते हैं। इसके साथ ही जीवन कौशल, आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। राज्य ओपन स्कूलों के सहयोग से संचालित इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है। एजुकेट गर्ल्स ने अगले दस वर्षों में एक करोड़ बालिकाओं और महिलाओं को कक्षा 10वीं तक शिक्षित करने का लक्ष्य रखा है।

अश्विन्ता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा हासिल करने की कोई उम्र नहीं होती। जरूरत सिर्फ एक अवसर, परिवार के सहयोग और मजबूत इरादों की होती है।

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