102 एंबुलेंस सेवा पर उठे सवाल, रास्ते में पेड़ के नीचे हुआ प्रसव

कोरबा/पसान। पसान क्षेत्र के बाघिनडांड़ गांव में 102 एंबुलेंस सेवा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही पेड़ के नीचे बच्चे को जन्म देना पड़ा। परिजनों और मितानिन ने एंबुलेंस चालक पर पर्याप्त समय तक इंतजार नहीं करने का आरोप लगाया है। हालांकि, एंबुलेंस चालक ने आरोपों को खारिज करते हुए करीब डेढ़ घंटे तक इंतजार करने का दावा किया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों से पूरे मामले में व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, घटना पंडरीपानी पंचायत के बांधापारा क्षेत्र की है। बाघिनडांड़ निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने मितानिन को सूचना दी। इसके बाद मितानिन ने 102 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। एंबुलेंस गांव तक पहुंची, लेकिन महिला का घर मुख्य सड़क से करीब 400 मीटर अंदर दुर्गम रास्ते पर स्थित होने के कारण वाहन वहां तक नहीं पहुंच सका।
मितानिन का आरोप- कुछ देर इंतजार करने का किया था आग्रह
मितानिन के अनुसार, उन्होंने एंबुलेंस कर्मियों से महिला को मुख्य सड़क तक लाने के लिए 5 से 10 मिनट इंतजार करने का आग्रह किया था। उनका आरोप है कि चालक ने इंतजार करने से इनकार कर दिया और एंबुलेंस वहां से चली गई। बाद में निजी नंबर पर संपर्क करने पर कथित तौर पर बताया गया कि एंबुलेंस आगे निकल चुकी है और अब वापस नहीं आ सकती।
इसके बाद मितानिन और परिजन प्रसव पीड़िता को पैदल मुख्य सड़क तक लाने लगे। इसी दौरान उसकी प्रसव पीड़ा अचानक बढ़ गई। मुख्य सड़क तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में एक पेड़ के नीचे महिला का प्रसव कराना पड़ा।
निजी वाहन से अस्पताल पहुंचाया
प्रसव के बाद परिजनों ने निजी वाहन की व्यवस्था की और महिला तथा नवजात को अस्पताल पहुंचाया। इसके लिए परिवार को करीब 2,000 रुपए अपनी जेब से खर्च करने पड़े।
चालक ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर, 102 एंबुलेंस चालक अमर श्रीवास्तव ने लापरवाही के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि महिला का घर पहाड़ी के ऊपर था और वहां तक एंबुलेंस पहुंचना संभव नहीं था। उन्होंने दावा किया कि एंबुलेंस नाले के पास करीब डेढ़ घंटे तक रुकी रही। इसी दौरान रायपुर से भी आपातकालीन कॉल आने के कारण उन्हें वहां से रवाना होना पड़ा।
मितानिन और एंबुलेंस चालक के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास है। ऐसे में सवाल उठता है कि दुर्गम क्षेत्र में प्रसव जैसी आपात स्थिति के दौरान गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और समुचित समन्वय क्यों नहीं किया गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने दुर्गम इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने तथा ऐसी परिस्थितियों में त्वरित वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।





