Chhattisgarh

1 साल 9 माह की नन्हीं अक्षिता सिंह ने रचा इतिहास इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराया नाम

कोरिया बैकुंठपुर। छोटी उम्र में बच्चों की प्रतिभा अक्सर परिवार और आसपास के लोगों को ही आश्चर्यचकित करती है, लेकिन बैकुंठपुर की नन्हीं अक्षिता सिंह ने अपनी असाधारण स्मरणशक्ति और पहचान क्षमता से ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। तलवापारा बैकुंठपुर निवासी अक्षिता सिंह, पिता निशांत सिंह एवं माता महिमा सिंह की पुत्री हैं। महज 1 वर्ष 9 माह की उम्र में अक्षिता ने भारत के 28 राज्यों, 8 केंद्र शासित प्रदेशों तथा भारत के सभी पड़ोसी देशों की पहचान मात्र 3 मिनट 24 सेकंड में बताकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है।


अक्षिता की इस उपलब्धि की खास बात यह है कि जिस उम्र में अधिकांश बच्चे बोलना और आसपास की सामान्य चीजों को पहचानना सीख रहे होते हैं, उस उम्र में उसने देश के राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पड़ोसी देशों की पहचान करने की अद्भुत क्षमता का प्रदर्शन किया। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी संख्या में भौगोलिक पहचान को याद रखना और निर्धारित समय में सही-सही बताना निश्चित रूप से उसकी प्रतिभा और मेहनत को दर्शाता है।

अक्षिता के पिता निशांत सिंह और माता महिमा सिंह ने बताया कि अक्षिता शुरू से ही नई चीजों को जानने और पहचानने में विशेष रुचि दिखाती थी। परिवार ने उसकी रुचि को समझते हुए खेल-खेल में उसे विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पड़ोसी देशों के बारे में जानकारी देना शुरू किया। तस्वीरों, नक्शों और पहचान संबंधी अभ्यास के माध्यम से अक्षिता को लगातार सीखने का अवसर मिला। धीरे-धीरे उसकी स्मरणशक्ति और पहचानने की क्षमता इतनी बेहतर होती गई कि उसने इस उपलब्धि के लिए प्रयास किया।

अक्षिता ने निर्धारित प्रक्रिया के दौरान भारत के 28 राज्यों, 8 केंद्र शासित प्रदेशों तथा भारत के सभी पड़ोसी देशों की पहचान करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उसने यह पूरा प्रदर्शन महज 3 मिनट 24 सेकंड में पूरा किया। इतनी कम उम्र में इस प्रकार की उपलब्धि हासिल करना अपने आप में उल्लेखनीय है। अक्षिता सिंह की इस उपलब्धि की जानकारी सामने आने के बाद परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में खुशी का माहौल है। लोगों ने अक्षिता और उसके माता-पिता को बधाई देते हुए कहा कि नन्हीं उम्र में हासिल किया गया यह रिकॉर्ड क्षेत्र के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक है।

अक्षिता की उपलब्धि ने बैकुंठपुर और कोरिया जिले का नाम गौरवान्वित किया है। अक्षिता की कहानी यह संदेश भी देती है कि बच्चों में छिपी प्रतिभा को पहचानकर यदि परिवार उन्हें उचित वातावरण और प्रोत्साहन दे, तो छोटी उम्र में भी वे असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। अक्षिता के माता-पिता ने उसकी रुचि को दबाने के बजाय उसे सीखने का अवसर दिया, जिसका परिणाम आज इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

नन्हीं अक्षिता सिंह की इस उपलब्धि पर परिजनों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। परिवार को उम्मीद है कि आने वाले समय में अक्षिता अपनी प्रतिभा को और निखारते हुए शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगी।

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