विश्व पर्यावरण दिवस से पहले बच्चों में जागरूकता की अलख, वेल विशर फाउंडेशन और जीत कोचिंग ने कराया भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

कोरबा। आगामी विश्व पर्यावरण दिवस के मद्देनजर वेल विशर फाउंडेशन एवं जीत कोचिंग के संयुक्त तत्वावधान में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा उन्हें प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और प्रकृति के महत्व जैसे विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। बच्चों ने अपने प्रभावशाली भाषणों के माध्यम से पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते हुए लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर जीत कोचिंग के संचालक पंकज केसरी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने बच्चों से अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की। साथ ही जन्मदिन, विवाह और अन्य विशेष अवसरों पर उपहार स्वरूप पौधे भेंट करने की परंपरा को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
वेल विशर फाउंडेशन के सचिव चिराग शर्मा ने प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्लास्टिक आज पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। उन्होंने बच्चों को दैनिक जीवन में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया।
भाषण प्रतियोगिता में अदिति सिंह मरकाम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं टिया साहू द्वितीय तथा दीपक खांडेल तृतीय स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में सहभागिता और उत्साह को देखते हुए युवराज साहू, सृष्टि खांडेल, शुभम खांडेल एवं समीर खांडेल को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को वेल विशर फाउंडेशन की ओर से उपहार एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य करते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया और उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा दी।




