माहुल पत्ता तोड़ने गए बुजुर्ग पर मादा भालू का हमला, दो शावकों के साथ किया अटैक; गंभीर हालत में रायपुर रेफर

गरियाबंद,12 अक्टूबर 2026। गरियाबंद जिले में जंगल से वनोपज इकट्ठा करने गए एक बुजुर्ग पर मादा भालू और उसके दो शावकों ने हमला कर दिया। घटना में 55 वर्षीय गिरधारी विश्वकर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मदद के लिए दौड़े। इसके बाद घायल को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल गरियाबंद पहुंचाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रायपुर रेफर कर दिया गया। घटना के बाद जंगल में महुआ, माहुल पत्ता और अन्य वनोपज इकट्ठा करने जाने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह घटना गरियाबंद वन परिक्षेत्र के नहरगांव क्षेत्र स्थित सरईपानी जंगल की है। बताया जा रहा है कि नहरगांव निवासी गिरधारी विश्वकर्मा सोमवार सुबह माहुल पत्ता तोड़ने के लिए सरईपानी जंगल गए थे। इसी दौरान वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 582 में उनका सामना मादा भालू और उसके दो शावकों से हो गया। ग्रामीण मौके से भागने की कोशिश करता, इसी दौरान भालू ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से बुजुर्ग को संभलने का मौका नहीं मिला और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद जंगल में अफरा-तफरी मच गई। भालू के हमले के दौरान गिरधारी विश्वकर्मा की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों की आहट पाकर मादा भालू अपने दोनों शावकों के साथ जंगल की ओर भाग गई। इसके बाद ग्रामीणों ने घायल बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें जिला अस्पताल गरियाबंद ले जाया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने गिरधारी विश्वकर्मा का प्राथमिक उपचार किया। हालांकि, उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उन्हें रायपुर रेफर कर दिया गया। फिलहाल उनकी आगे की चिकित्सा को लेकर जानकारी सामने आना बाकी है।
गरियाबंद जिले के ग्रामीण बड़ी संख्या में आजीविका के लिए जंगलों से महुआ, माहुल पत्ता और अन्य वनोपज इकट्ठा करते हैं। ऐसे में जंगल के भीतर वन्यजीवों की मौजूदगी उनके लिए जोखिम पैदा कर सकती है। विशेष रूप से शावकों के साथ मौजूद मादा भालू खतरा महसूस होने पर हमला कर सकती है। इसलिए ग्रामीणों को जंगल में जाते समय सतर्क रहने और वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से जागरूकता और सुरक्षा संबंधी उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।




