बिहार में लगेगा 56 हजार करोड़ का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट, बांका से परमाणु ऊर्जा उत्पादन की तैयारी शुरू

पटना। बिहार अब ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। सरकारी बिजली कंपनी NTPC Limited ने राज्य के बांका जिले में 2.8 गीगावॉट क्षमता वाला विशाल न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 56 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। यदि यह परियोजना पूरी होती है, तो यह बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल होगी और राज्य पहली बार परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखेगा।
जानकारी के अनुसार यह परियोजना भारत सरकार के उस दीर्घकालिक ऊर्जा रोडमैप का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के जरिए केंद्र सरकार देश में स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना चाहती है।
सूत्रों के मुताबिक NTPC Parmanu Urja Nigam Limited, जो एनटीपीसी की परमाणु ऊर्जा इकाई है, बांका जिले में इस परियोजना को लेकर फिजिबिलिटी स्टडी करेगी। यह अध्ययन आगामी अक्टूबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है। स्टडी के दौरान परियोजना के लिए उपयुक्त जमीन, पानी की उपलब्धता, सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय पहलुओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
प्रस्ताव के तहत शुरुआती चरण में 700-700 मेगावॉट की दो यूनिट स्थापित की जाएंगी। बाद में इस परियोजना का विस्तार कर कुल चार यूनिट तक पहुंचाया जा सकता है। इस तरह संयंत्र की कुल उत्पादन क्षमता 2.8 गीगावॉट तक हो जाएगी। बताया जा रहा है कि बिहार सरकार ने परियोजना के लिए आवश्यक जल उपलब्धता और प्रारंभिक अध्ययन को मंजूरी दे दी है।
फिजिबिलिटी स्टडी पूरी होने के बाद एनटीपीसी परमाणु ऊर्जा विभाग से आगे की स्वीकृतियां प्राप्त करेगी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और निर्माण प्रक्रिया को गति दी जाएगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना बिहार की आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर बदल सकती है। लंबे समय से बिजली संकट और औद्योगिक पिछड़ेपन से जूझ रहे बिहार को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा सड़क, पानी, आवास और अन्य बुनियादी ढांचे का भी तेजी से विकास होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बिहार ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनता है, तो इसका असर पूरे पूर्वी भारत की औद्योगिक प्रगति पर पड़ सकता है। बड़े उद्योगों के निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और राज्य आर्थिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर सकता है।
बांका में प्रस्तावित यह न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में बिहार की पहचान को केवल कृषि प्रधान राज्य से आगे बढ़ाकर ऊर्जा और औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।




