बिहार की 24 हजार महिला डेयरी किसानों को मिलेगी AI आधारित सलाह, डिजिटल ग्रीन, जीविका और गोदरेज एग्रोवेट ने शुरू की नई पहल

नालंदा, बिहार। बिहार की महिला डेयरी किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उनकी आय और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। डिजिटल ग्रीन इंडिया ने गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के सहयोग और बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (जीविका-बीआरएलपीएस) के साथ साझेदारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सलाह सेवा शुरू की है। इस पहल के तहत अगले तीन वर्षों में नालंदा और गया जिले की 24 हजार महिला डेयरी किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में पशुपालन और डेयरी प्रबंधन से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
यह योजना नालंदा जिले के बेन, हरनौत और अस्थावां तथा गया जिले के बोधगया, वजीरगंज और फतेहपुर सहित कुल छह प्रखंडों में लागू की जाएगी। इसके लिए डिजिटल ग्रीन के एआई आधारित प्लेटफॉर्म ‘फार्मरचैट’ का उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से महिला किसान टेक्स्ट और आवाज के जरिए अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकेंगी। साथ ही पशुओं में होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए तस्वीरें भेज सकेंगी और मौसम संबंधी जानकारी तथा डेयरी प्रबंधन से जुड़े जरूरी अलर्ट भी प्राप्त कर सकेंगी।
इस परियोजना के पहले वर्ष में 12 हजार महिला किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 185 जमीनी स्तर के विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरे और तीसरे वर्ष में प्रत्येक वर्ष 92 अतिरिक्त कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं तक इस तकनीक का लाभ पहुंचाया जा सके।
परियोजना का प्रमुख उद्देश्य महिला किसानों को पशुपालन संबंधी बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाना, पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार करना और डेयरी उत्पादन बढ़ाना है। इसके जरिए तीसरे वर्ष तक महिला डेयरी किसानों की आय में 12 से 15 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डिजिटल ग्रीन इंडिया की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि भसीन ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद विशेषज्ञों की सलाह अक्सर सीधे उन तक नहीं पहुंच पाती। फार्मरचैट के माध्यम से महिलाओं को उनकी भाषा में समय पर भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पशुओं की सेहत, डेयरी उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
जीविका-बीआरएलपीएस के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (पशुधन) डॉ. राकेश कुमार सिंह ने बताया कि जीविका पिछले 20 वर्षों से बिहार की महिला किसानों की आजीविका बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे बिहार में विस्तार देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
वहीं, गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड के एनिमल न्यूट्रिशन बिजनेस के सीईओ कैप्टन (डॉ.) ए. वाई. राजेंद्र ने कहा कि डेयरी फार्मिंग ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। एआई आधारित तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाकर उनकी उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद की जाएगी।
इस पहल के शुभारंभ अवसर पर जीविका, पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के अधिकारी, गोदरेज एग्रोवेट और डिजिटल ग्रीन इंडिया के प्रतिनिधि, डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य, पशु सखियां और बड़ी संख्या में डेयरी किसान उपस्थित रहे।




