बिलासपुर केंद्रीय जेल से 20 उम्रकैद के बंदियों की रिहाई का रास्ता साफ, 19 हुए रिहा, अच्छे आचरण के आधार पर शासन ने लिया फैसला

बिलासपुर, 26 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 20 बंदियों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। जेल में करीब 14 साल या उससे अधिक समय बिताने वाले इन बंदियों को अच्छे आचरण और अनुशासन के आधार पर शासन के निर्देश पर रिहा किया जा रहा है। इनमें से 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया है, जबकि एक बंदी रायपुर के अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बिलासपुर केंद्रीय जेल प्रबंधन के अनुसार, लंबे समय से सजा काट रहे इन बंदियों के व्यवहार, अनुशासन और जेल नियमों के पालन को ध्यान में रखते हुए रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई है। वर्षों बाद जेल से बाहर आए बंदियों को अब अपने परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करने का अवसर मिलेगा। जेल प्रशासन का मानना है कि अच्छे आचरण के आधार पर रिहाई का यह निर्णय अन्य बंदियों को भी अनुशासित जीवन जीने के लिए प्रेरित करेगा।
बिलासपुर केंद्रीय जेल में क्षमता से अधिक बंदियों की संख्या भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जेल की स्वीकृत क्षमता 2,290 बंदियों की है, जबकि वर्तमान में यहां करीब 3,518 बंदी रखे गए हैं। इस तरह निर्धारित क्षमता से 1,228 अधिक बंदी जेल में मौजूद हैं। बंदियों की बढ़ती संख्या के कारण जेल प्रशासन को व्यवस्थाओं के संचालन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जेल में बढ़ते दबाव को कम करने के लिए 1,500 बंदियों की क्षमता वाली नई जेल का निर्माण किया जा रहा है। नई जेल के तैयार होने के बाद बंदियों को रखने की व्यवस्था बेहतर होने और मौजूदा केंद्रीय जेल पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी ने बताया कि अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किए गए बंदियों को अब परिवार और समाज के बीच लौटकर नई शुरुआत करने का मौका मिलेगा। उन्होंने जेल में बंद अन्य कैदियों से भी अनुशासन बनाए रखने, जेल के नियमों का पालन करने और अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की है।
जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर केंद्रीय जेल में वर्तमान में करीब 1,100 सजायाफ्ता बंदी हैं। वहीं, 65 अन्य बंदियों की रिहाई से संबंधित आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं। इन आवेदनों पर नियमानुसार निर्णय होने के बाद आने वाले समय में कुछ और बंदियों की रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है।
गौरतलब है कि लंबे समय तक जेल में रहने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटना बंदियों के लिए एक नई चुनौती भी होती है। परिवार के साथ दोबारा जुड़ने, सामाजिक स्वीकार्यता हासिल करने और सम्मानजनक जीवन शुरू करने के लिए उन्हें कई परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अच्छे आचरण के आधार पर मिली रिहाई उनके जीवन में सुधार और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।




