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पश्चिम बंगाल की कोयला खदान में बड़ा हादसा टला: 200 फीट नीचे फंसे ECL के 12 मजदूरों का सुरक्षित रेस्क्यू, 13 घंटे चला बचाव अभियान

पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान जिले में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की कोयला खदान में बड़ा हादसा टल गया। बंकोला क्षेत्र की कुमारडीह ‘ए’ कोलियरी में लिफ्ट खराब होने से जमीन से करीब 200 फीट नीचे फंसे 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सोमवार शाम हुई इस घटना के बाद खदान परिसर में अफरा-तफरी मच गई थी। मजदूरों को बाहर निकालने के लिए करीब 13 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। मंगलवार सुबह सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली।

जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम मजदूर खदान के अंदर आने-जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लिफ्ट में सवार थे। स्थानीय भाषा में इस लिफ्ट को ‘डोली’ कहा जाता है। इसी दौरान लिफ्ट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई, जिससे उसका संचालन बंद हो गया और सभी 12 मजदूर जमीन से लगभग 200 फीट नीचे फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही खदान प्रबंधन और बचाव दल सक्रिय हो गया।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, लिफ्ट को संचालित करने वाली तार या रस्सी इंजन रूम में लगे ड्रम में उलझ गई थी। इसके कारण लिफ्ट अचानक रुक गई और मजदूर नीचे ही फंस गए। तकनीकी टीम ने खराबी दूर करने के लिए तत्काल मरम्मत कार्य शुरू किया। रस्सी को ड्रम से सुरक्षित तरीके से निकालने के लिए ड्रम को उल्टी दिशा में घुमाने का प्रयास किया गया, ताकि लिफ्ट का संचालन दोबारा शुरू किया जा सके।

खदान में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती थी। तकनीकी खराबी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन लंबा खिंच गया। करीब 13 घंटे की मशक्कत के बाद मंगलवार सुबह सभी 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। मजदूरों के बाहर आने के बाद खदान प्रबंधन और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली।

इस घटना ने कोयला खदानों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों के आवागमन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों का दावा है कि कुछ महीने पहले ही संबंधित लिफ्ट की मरम्मत कराई गई थी। इसके बावजूद दोबारा तकनीकी खराबी आना चिंता का विषय है।

मजदूरों ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी खदान में डोली फंसने की घटनाएं हो चुकी हैं। लिफ्ट की रस्सी से जुड़ी समस्याएं भी पहले सामने आ चुकी थीं। इसके बावजूद तकनीकी खामियों का स्थायी समाधान नहीं किया गया। घटना के बाद खदानों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और लिफ्ट सहित अन्य उपकरणों की नियमित जांच की आवश्यकता एक बार फिर सामने आई है।

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