कैडेट राहुल का हुआ सम्मानः छह दौर की अग्निपरीक्षा पार कर एआईटीएससी में लहराया परचम, केएन कॉलेज में हुआ स्वागत

कोरबा। कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर कमला नेहरू कॉलेज के एनसीसी कैडेट राहुल विश्वकर्मा ने अखिल भारतीय थल सैनिक कैंप (एआईटीएससी) में उम्दा प्रदर्शन कर कोरबा व छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। दिल्ली में 1 से 11 सितंबर तक आयोजित थल सैनिक कैंप में राहुल ने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कैंप से लौटने पर उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य डाॅ प्रशांत बोपापुरकर से भेंटकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। प्राचार्य डाॅ बोपापुरकर ने उपहार प्रदान कर राहुल को सम्मानित किया। इस अवसर पर काॅलेज की एनसीसी प्रभारी लेफ्टिनेंट अनिता यादव मौजूद रहीं।
महाविद्यालय में बीबीए अंतिम वर्ष के छात्र राहुल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न सिर्फ कोरबा जिला बल्कि पूरा छत्तीसगढ़ राज्य गौरवान्वित हुआ है। थलसेना कैम्प दिल्ली तक का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक रूप से कडे़ इम्तिहानों से गुजरना पड़ता है। राहुल विश्वकर्मा ने अपनी ट्रेनिंग के दौरान उच्च स्तर का अनुशासन, साहस और रणकौशल प्रदर्शित किया। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और हर मोर्चे पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दिल्ली कैम्प के लिए अपना स्थान सुरक्षित किया। प्राचार्य डाॅ बोपापुरकर ने कहा कि राहुल की यह उपलब्धि अन्य छात्रों और एनसीसी कैडेट्स के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनेगी। राहुल ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। उनके पिता राजेश कुमार एवं मां श्रीमती रमा विश्वकर्मा ने हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया है।
कई चरणों के कठिन पड़ाव पार कर पहुंचे दिल्ली
थल सैनिक कैंप के आखिरी पड़ाव तक पहुंचना आसान नहीं होता। दिल्ली पहुंचने से पहले राहुल विश्वकर्मा को चयन के कई कठिन दौर से गुजरना पड़ा। सबसे पहले 1 छत्तीसगढ़ बटालियन कोरबा की चयन प्रक्रिया में प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके उपरांत कैडेट्स को छह अलग-अलग चरणों में खुद को साबित करना पड़ता है। इनमें यूनिट-बटालियन स्तर पर चयन, कंबाइंड एनुअल ट्रेनिंग कैंप-इंटर बटालियन कैंप, इंटर ग्रुप कॉम्पिटिशन -ग्रुप कैंप, प्री-टीएससी कैंप, फाइनल थल सैनिक कैंप (एआईटीएससी) शामिल हैं। हर कैंप में बेहतर प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़ना होता है और कम से कम टॉप-10 में जगह बनानी पड़ती है। लगातार प्रतिस्पर्धा के बीच हर चरण में अच्छा प्रदर्शन ही अगले पड़ाव का रास्ता खुलता है।




