शहर में 13 सिटी फाॅरेस्ट हो रहे डेवलप: भोपाल में 510 ग्रीन बेल्ट, इनमें से 125 पर बन गए चबूतरे, गुमठियां और पार्किंग

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भोपालएक घंटा पहले

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एमपी नगर जोन वन। - Dainik Bhaskar

एमपी नगर जोन वन।

राजधानी में 7 नए और करीब 6 पुराने मिलाकर कुल 13 सिटी फॉरेस्ट डेवलप किए जा रहे हैं। लेकिन, शहर में जो ग्रीन कारपेट एरिया यानी ग्रीन बेल्ट खुद सरकारी एजेंसियों ने डेवलप किए थे, वे उजड़ रहे हैं। हद यह है कि जानकारी के बाद भी इन्हें बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे।

सीपीए सिटी फॉरेस्ट विंग, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के मिलाकर ऐसे करीब 510 ग्रीन बेल्ट डेवलप किए हैं। इनमें से करीब 125 की सूची सीपीए ने एक साल पहले नगर निगम को भेजी भी गई थी। जिसमें बताया गया था कि धार्मिक स्थान बनाने, गुमठियां लगाने और पार्किंग के नाम पर इन ग्रीन बेल्ट को उजाड़ा जा रहा है। लेकिन, एक साल बाद भी एक भी कार्रवाई नहीं हुई और ग्रीन बेल्ट के उजड़ने का सिलसिला जारी है। जबकि इन ग्रीन बेल्ट समेत दूसरे सिटी फॉरेस्ट को बचाने के लिए मप्र वृक्षों का परिरक्षण (नगरीय क्षेत्र) अधिनियम 2001 बना हुआ है।

इसमें किसी भी जगह वृक्षों की अवैध कटाई होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जुर्माना या दो साल की सजा का प्रावधान है। इसी अधिनियम के तहत नगर निगम में ट्री ऑफिसर की नियुक्ति होती है, जो पेड़ों के संरक्षण की चिंता करता है।

बता दें कि शहरी क्षेत्र में बनने वाली 80 फीट और 200 फीट सड़क के किनारे 10 से 40 फीट चौड़ा ग्रीन कवर एरिया बनाया जाता है। सीपीए, निगम और पीडब्ल्यूडी अपनी-अपनी सड़क के किनारे पौधरोपण से पहले ही फेंसिंग करते हैं और फिर पांच साल तक इनका संरक्षण भी करते हैं।

कहां, क्या हाल…

एम्स के सामने वाली रोड के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट बनाया गया था, जिसमें अब गुमठी और पार्किंग हो गई है। इसी प्रकार एमपी नगर जोन 1 में गायत्री मंदिर के पीछे एक पूरा हरा भरा इलाका था, जहां अब पेड़ काटकर पार्किंग कराई जा रही है। वहीं आशिमा मॉल से कटारा की तरफ जाने वाली सड़क पर केंद्रीय विद्यालय के सामने वाले ग्रीन बेल्ट में व्यवसाय शुरू हो गया। उधर कटारा में भी 80 फीट रोड की बगल में दर्जन भर धार्मिक स्थान बन गए।

जिम्मेदार बोले- एजेंसियों को अपने-अपने ग्रीन बेल्ट संरक्षित करना है

हमारे पास सीपीए की तरफ से एक सूची आई थी और हमने कार्रवाई भी की है, लेकिन असल में एजेंसियों को अपने-अपने ग्रीन बेल्ट संरक्षित करना है। -वीएस चौधरी कोलसानी, आयुक्त, ननि भोपाल

हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इसमें सहमति बनी थी कि शहरी क्षेत्र में जिस एजेंसी ने ग्रीन बेल्ट बनाया है, अब वही उनकी सुरक्षा करेगी। -आलोक पाठक, डीएफओ पर्यावरण वन मंडल

वर्ष 2001 में एक्ट बनाया गया कि नगर निगम सीमा में किसी भी तरह की अवैध पेड़ कटाई होती है या फिर ग्रीन बेल्ट वाले एरिया में अतिक्रमण होता है तो उसे हटाने और कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम के ट्री ऑफिसर की होगी। वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं।

-सुदेश वाघमारे, पर्यावरणविद एवं रिटायर्ड फॉरेस्ट ऑफिसर

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