Chhattisgarh

“ऊर्जा नगरी कोरबा के मजदूर: कोयले से करंट तक देश को रोशन करने वाले अनदेखे नायक”

कोरबा, 30 अप्रैल। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ का औद्योगिक हृदय Korba एक बार फिर उन लाखों श्रमिकों के संघर्ष और समर्पण की कहानी कहता है, जिनकी मेहनत से यह जिला “ऊर्जा नगरी” के रूप में देशभर में पहचान रखता है। यहां कोयले की खदानों से लेकर विशाल ताप विद्युत संयंत्रों तक, हर जगह मजदूरों की मेहनत ही विकास की असली ताकत है।

कोरबा को देश का “पावर हब” कहा जाता है, जहां South Eastern Coalfields Limited की विशाल खदानें—गेवरा, दीपका और कुसमुंडा—दिन-रात कोयला उत्पादन करती हैं। यह क्षेत्र भारत के सबसे बड़े कोलफील्ड्स में से एक है, जहां से निकलने वाला कोयला देश के कई बड़े बिजली संयंत्रों को ऊर्जा देता है।
इन खदानों में काम करने वाले मजदूर कठिन परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, फिर भी उनके चेहरे पर देश के विकास में योगदान का गर्व साफ दिखाई देता है।

कोरबा में बिजली उत्पादन का विशाल नेटवर्क है। NTPC Limited का कोरबा सुपर थर्मल पावर प्लांट लगभग 2600 मेगावाट क्षमता के साथ देश के प्रमुख संयंत्रों में शामिल है। इसके अलावा Chhattisgarh State Power Generation Company Limited के हसदेव, कोरबा ईस्ट और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत संयंत्र भी हजारों मजदूरों के श्रम से संचालित होते हैं।

निजी क्षेत्र में भी कोरबा पीछे नहीं है। Adani Power का कोरबा प्लांट, जिसकी वर्तमान क्षमता लगभग 600 मेगावाट है और विस्तार के साथ इसे 3000 मेगावाट से अधिक तक ले जाने की योजना है, यहां के श्रमिकों के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बना हुआ है।


इसी तरह Bharat Aluminium Company, जो Vedanta Limited का हिस्सा है, देश के प्रमुख एल्यूमिनियम उत्पादकों में से एक है और हजारों मजदूरों को रोजगार देता है।


यहां स्थित पावर प्लांट की क्षमता भी 2000 मेगावाट से अधिक है, जो औद्योगिक गतिविधियों को ऊर्जा प्रदान करता है।

इसके अलावा कोरबा में हसदेव थर्मल पावर स्टेशन, बालको कैप्टिव पावर प्लांट, और अन्य कई निजी व सरकारी संयंत्र मिलकर इस जिले को देश की ऊर्जा राजधानी बनाते हैं।

लेकिन इस चमक के पीछे एक सच्चाई भी है—कोरबा भारत के सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में भी गिना जाता है, जहां कोयला खनन और बिजली उत्पादन के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां बनी रहती हैं।
इन परिस्थितियों में काम करने वाले मजदूरों का जीवन आसान नहीं है। धूल, गर्मी, प्रदूषण और जोखिम के बीच वे अपने परिवार और देश के लिए लगातार संघर्ष करते हैं।

मजदूर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि विकास की हर ऊंची इमारत, हर जलती हुई बत्ती और हर चलता हुआ उद्योग—इन सबके पीछे मजदूरों का पसीना और त्याग छिपा है।

कोरबा के ये मजदूर सिर्फ श्रमिक नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा व्यवस्था के असली नायक हैं—जो बिना रुके, बिना थके, हर दिन भारत को रोशन करने में जुटे हैं।

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