अंतिम चरण में गेवरारोड-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर, मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद

कोरबा। कोरबा और रायगढ़ की कोयला खदानों से देश के विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों तक कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाया जा रहा गेवरारोड-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने के बाद कोयले का परिवहन मुख्य रेल मार्ग के बजाय इस समर्पित कॉरिडोर से होगा, जिससे मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा और यात्री ट्रेनों के संचालन के साथ उनकी समयबद्धता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
देश में बिजली उत्पादन के लिए कोयले की लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द पूरा करने पर जोर दे रही है। निर्माण एजेंसी इरकॉन पर भी कार्य शीघ्र पूरा करने का दबाव है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर मंडल के डीआरएम राकेश रंजन ने बताया कि पहले इस परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब इसकी समय-सीमा बढ़ाकर मार्च 2027 कर दी गई है।
परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत 838 करोड़ रुपये थी, लेकिन निर्माण में लगातार हुई देरी, भूमि आवंटन की समस्याओं और लागत में वृद्धि के कारण इसका बजट बढ़कर लगभग 12,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे पहले इसकी संशोधित लागत 4,970 करोड़ रुपये आंकी गई थी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार अब केवल ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन (ओएचई), सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी कार्य शेष हैं, जिन्हें तेजी से पूरा किया जा रहा है।
गेवरारोड-पेंड्रारोड रेल कॉरिडोर परियोजना की आधिकारिक शुरुआत 5 अप्रैल 2014 को हुई थी, जबकि भौतिक निर्माण कार्य सितंबर 2018 में शुरू हुआ। प्रारंभिक लक्ष्य वर्ष 2020 तक परियोजना पूरी करने का था, लेकिन कोविड-19 महामारी, भूमि अधिग्रहण में विलंब और निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी। अब रेलवे को उम्मीद है कि मार्च 2027 तक परियोजना पूरी होने के बाद कोयला परिवहन अधिक सुगम होगा और मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर यात्री ट्रेनों के संचालन को भी बड़ी राहत मिलेगी।




