Chhattisgarh

बालको नगर की प्रभंजना वैष्णव को ‘विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान’ से सम्मानित, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में मिला राष्ट्रीय गौरव

कोरबा। बालको नगर (कोरबा) की प्रभंजना वैष्णव को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर “विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान” (मानद डॉक्टरेट, पीएचडी समतुल्य) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ, वृन्दावन धाम (मथुरा) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में प्रदान किया गया।

नई दिल्ली के पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित इस भव्य समारोह में देशभर से शिक्षा, साहित्य, चिकित्सा, योग, समाजसेवा, पर्यावरण एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले विद्वानों को मेडल, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।

बालको निवासी राघवेंद्र दास वैष्णव की बहू एवं निर्वेद वैष्णव की पत्नी प्रभंजना वैष्णव को योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों तथा विद्यापीठ के अधिकारियों की अनुशंसा के आधार पर “विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान” प्रदान किया गया। यह सम्मान मानद पीएचडी के समकक्ष माना जाता है और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किया जाता है।

समारोह में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यापीठ के कुलपति डॉ. इंदुभूषण मिश्र ‘देवेन्दु’ ने की, जबकि डॉ. हरिभाई आर्यन एवं डॉ. नरेंद्र सिंह तोमर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मुख्य वक्ता के रूप में शिक्षाविद एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रुतिकीर्ति सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिन्दी को भारत की राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हिन्दी की बढ़ती लोकप्रियता और व्यापक उपयोग को देखते हुए इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा दिए जाने की दिशा में निरंतर प्रयास होने चाहिए।

विद्यापीठ के कुलपति डॉ. इंदुभूषण मिश्र ने बताया कि “विद्या वाचस्पति” एवं “विद्या वारिधि सारस्वत सम्मान” हिन्दी लेखन, शिक्षा के उन्नयन, पर्यावरण संरक्षण, चिकित्सा सेवा, योग, विधि सहायता और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को प्रदान किए जाते हैं।

मुख्य वक्ता डॉ. श्रुतिकीर्ति सिंह ने युवाओं से हिन्दी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करने का आह्वान करते हुए भारतीय संस्कृति, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। वहीं डॉ. हरिभाई आर्यन ने प्रत्येक कार्य को ईश्वर प्रणिधान एवं धर्म के पालन की भावना से करने का संदेश दिया।

राष्ट्रीय हिन्दी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, चिकित्सकों, योगाचार्यों, साहित्यकारों, लेखकों, शिक्षकों एवं समाजसेवियों ने हिन्दी भाषा के विकास और उसके व्यापक प्रचार-प्रसार पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के अंत में विद्यापीठ की ओर से सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन कशिश चावला ने किया।

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