पटवारियों के बाद कृषि विस्तार अधिकारियों ने भी गिरदावरी से किया इनकार, अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

कोरबा, 29 सितंबर। कोरबा जिले में खरीफ फसल की गिरदावरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पटवारियों के बाद अब ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने भी पीवी (PV) एप के माध्यम से खरीफ फसल की गिरदावरी करने से इनकार कर दिया है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने सोमवार को उपसंचालक कृषि को ज्ञापन सौंपकर उन्हें अतिरिक्त कार्य से मुक्त करने की मांग की। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
राज्य शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष खेतों में बोई गई फसलों का भौतिक सत्यापन कराकर गिरदावरी कराई जाती है। गिरदावरी के माध्यम से यह जानकारी दर्ज की जाती है कि संबंधित खसरा नंबर की भूमि पर कौन सी फसल बोई गई है। इसी रिकॉर्ड के आधार पर फसल संबंधी विभिन्न सरकारी योजनाओं, आंकड़ों और कृषि व्यवस्था के लिए आवश्यक जानकारी तैयार की जाती है।
अब तक पटवारियों द्वारा अपनी आईडी के माध्यम से ऑनलाइन फसल की जानकारी दर्ज कर गिरदावरी का कार्य किया जा रहा था। इसी बीच 18 सितंबर को शासन की ओर से नए पीवी एप के माध्यम से गिरदावरी करने के निर्देश जारी किए गए। पटवारियों ने एप से संबंधित तकनीकी एवं व्यावहारिक समस्याओं का हवाला देते हुए गिरदावरी का कार्य करने से इनकार कर दिया। इसके बाद जिन गांवों में अभी तक गिरदावरी पूरी नहीं हुई है, वहां यह जिम्मेदारी कृषि विभाग के मैदानी अमले को सौंपने के निर्देश दिए गए।
इस निर्णय से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी नाराज हैं। उनका कहना है कि गिरदावरी राजस्व विभाग से संबंधित प्रमुख कार्य है। कृषि विभाग का मैदानी अमला पहले से ही फसल निरीक्षण, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, विभिन्न कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन, फसल सुरक्षा, कृषि आदानों की मांग तथा अलग-अलग सर्वेक्षण जैसे कार्यों में व्यस्त है। इसके अलावा वर्तमान समय में फसल से संबंधित ऑनलाइन जीटी सर्वे का कार्य भी किया जा रहा है। ऐसे में गिरदावरी का अतिरिक्त दायित्व सौंपे जाने से विभागीय कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने सोमवार को उपसंचालक कृषि कार्यालय पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और ज्ञापन सौंपा। उन्होंने पीवी एप के माध्यम से खरीफ फसल की गिरदावरी का अतिरिक्त कार्य वापस लेने की मांग की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांग पर उचित निर्णय नहीं होने की स्थिति में वे अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह अपनाएंगे।
रिकॉर्ड के अनुसार कोरबा जिले में कुल 712 गांव हैं। इनमें से अब तक 96 गांवों में खरीफ फसल की गिरदावरी पूरी नहीं हो सकी है। इन्हीं 96 गांवों की गिरदावरी का दायित्व ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को सौंपे जाने की बात सामने आई है। गिरदावरी पूरी नहीं होने तक संबंधित खेतों में बोई गई फसलों का अंतिम और सही रिकॉर्ड तैयार नहीं हो सकेगा। ऐसे में गिरदावरी को लेकर राजस्व और कृषि विभाग के बीच कार्य विभाजन का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है।




