Chhattisgarh

नाली निर्माण के भुगतान में अनियमितता का आरोप, पार्षद ने सीएमओ से मांगे दस्तावेज

जांजगीर-चांपा। नगरपालिका परिषद जांजगीर-नैला के वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद विष्णु यादव (छोटू) ने वार्ड क्रमांक 06, 07 एवं 08 में चल रहे आरसीसी नाली निर्माण कार्य के भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई है। उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र सौंपकर मामले में कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए 7 दिनों के भीतर प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है।

पार्षद ने अपने पत्र में बताया कि “राजू सिंह के घर से ओंकार के घर तक आरसीसी नाली निर्माण” कार्य की तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 560 दिनांक 13 दिसंबर 2022 को 77.40 लाख रुपये की लागत से जारी हुई थी। वर्तमान में इस कार्य के लिए 34.84 लाख रुपये का द्वितीय चालू खाता बिल तैयार किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रनिंग बिल में कई ऐसी मदें और सामग्रियां शामिल कर दी गई हैं, जो मूल तकनीकी स्वीकृति और प्राक्कलन में शामिल नहीं थीं। पार्षद के अनुसार बिल में सीमेंट कंक्रीट मलबा ढहाई, फव्वारे एवं अन्य उद्देश्यों के लिए खुदाई, पानी की पंपिंग द्वारा निकासी, उप-बोर सह जल निकासी परत आधार तथा खुदाई की मिट्टी से भराई जैसी मदें जोड़ी गई हैं, जिन पर लाखों रुपये का भुगतान प्रस्तावित है।

विष्णु यादव ने यह भी आरोप लगाया कि सामग्री क्रमांक 11 और 12 में शटरिंग (फॉर्म वर्क) की माप इकाई नियमों के विपरीत वर्ग मीटर के स्थान पर घन मीटर अंकित की गई है, जो तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 94(3) एवं छत्तीसगढ़ नगरपालिका लेखा नियम 1971 के नियम 71 का हवाला देते हुए कहा कि मूल प्राक्कलन से बाहर किसी भी अतिरिक्त कार्य या सामग्री के भुगतान के लिए संशोधित तकनीकी स्वीकृति और परिषद की औपचारिक मंजूरी आवश्यक होती है।

पार्षद ने सीएमओ से सवाल किया है कि क्या अतिरिक्त मदों के लिए सक्षम अधिकारी से संशोधित तकनीकी स्वीकृति ली गई है तथा क्या इन दरों को तकनीकी समिति एवं परिषद से अनुमोदित कराया गया है। उन्होंने “फव्वारा खुदाई” जैसी मद जोड़ने के तकनीकी औचित्य पर भी सवाल उठाया है।

उन्होंने मांग की है कि जब तक पूरे मामले का दस्तावेजों सहित स्पष्ट जवाब नहीं मिल जाता, तब तक संबंधित बिल के आगामी भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि बिना सक्षम स्वीकृति के भुगतान किया गया तो इसे अवैध व्यय माना जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

पार्षद ने 7 दिनों के भीतर लिखित जवाब मांगा है। साथ ही शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर जांजगीर-चांपा एवं नगरपालिका परिषद अध्यक्ष को भी भेजी गई है।

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