Chhattisgarh

जांजगीर-चांपा में शिक्षा सुधार की नई पहल, कलेक्टर ने शिक्षकों के नवाचारों से तैयार की बेहतर कार्ययोजना

जांजगीर-चांपा, 08 सितम्बर 2026। जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम बेहतर करने के लिए कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने ज्ञानदीप एवं शिक्षा दूत से पुरस्कृत शिक्षकों के साथ संवाद किया। इस दौरान शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों और सफल शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी साझा की। संवाद, कार्यशाला एवं कार्ययोजना कार्यक्रम में इन नवाचारों को जिले की शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी रूप से लागू करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम में पुरस्कृत शिक्षकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने और शिक्षा को रोचक बनाने के लिए विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, कबाड़ से जुगाड़, मुस्कान पुस्तकालय, सामुदायिक सहभागिता से शाला विकास, जादुई पिटारा और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन नवाचारों के माध्यम से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने, विद्यालय परिसर को बेहतर बनाने, वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और शाला छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे ऐसे नवाचार बच्चों के सर्वांगीण विकास और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञानदीप और शिक्षा दूत से सम्मानित शिक्षक जिले के अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।

कलेक्टर ने कहा कि विद्यालयों में किए जा रहे अच्छे कार्य केवल योजनाओं और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों को अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों और रचनात्मक गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करने के लिए भी प्रेरित किया। इससे दूसरे शिक्षक इन गतिविधियों से सीख लेकर अपने विद्यालयों में भी बेहतर प्रयोग कर सकेंगे।

कलेक्टर ने जिले के सभी विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किचन गार्डन के माध्यम से बच्चों को प्रकृति, पर्यावरण, पोषण और पौधों की देखभाल की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी। इससे विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।

बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन, नियमित अभ्यास और विशेष शिक्षण व्यवस्था की जानी चाहिए। कक्षा में छोटे-छोटे टेस्ट और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर दिए जाएं, ताकि उनके मन से परीक्षा का डर कम हो और पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़े। कलेक्टर ने जिला परीक्षा समिति को भी विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए तैयार कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था करने तथा सतत मूल्यांकन के माध्यम से उनकी शैक्षणिक क्षमता में सुधार लाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा देने के बजाय उनका सर्वांगीण विकास जरूरी है। विद्यार्थियों को सभी विषयों में दक्ष बनाने के साथ उनके कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इकोनॉमी, जियोग्राफी और गणित जैसे विषयों को रोचक एवं प्रभावी तरीके से पढ़ाने के लिए शिक्षकों को गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों का उपयोग करने की सलाह दी गई।

कलेक्टर ने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में नैतिक शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य और नवाचार करने वाले शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयास जिले की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में सहायक होंगे।

कार्यक्रम के दौरान नवाचार और उत्कृष्ट कार्यों के लिए शिक्षकों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य और शिक्षकगण उपस्थित रहे।

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