खेलो इंडिया संवाद में युवाओं ने रखे विकसित भारत के लिए सुझाव, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया नशामुक्ति का आह्वान

रायपुर, 27 अगस्त 2026। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर रायपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में ‘खेलो इंडिया संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने देशभर के युवाओं को वर्चुअली संबोधित किया। देश के विभिन्न शहरों में करीब 1600 स्थानों से जुड़े 8 लाख से अधिक युवाओं ने इस संवाद में भाग लिया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा और यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा भी मौजूद रहीं। एनआईटी के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और युवाओं ने ‘युवा संवाद’ के दौरान खेल सुविधाओं के विस्तार, खेल अधोसंरचना के विकास, खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए प्रतिभाओं को तैयार करने, नशामुक्ति, युवा नेतृत्व, शासन में युवाओं की भागीदारी और युवा सशक्तीकरण जैसे विषयों पर अपने विचार एवं सुझाव रखे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत के निर्माण में भारत की खेल शक्ति और युवाशक्ति को जोड़ने का अभियान है। उन्होंने कहा कि खेल में आगे बढ़ना केवल मैदान पर जीत हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, परिवार और देश के गौरव को आगे बढ़ाना भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में 21वीं सदी के आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। देश में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने स्पोर्ट्स साइंस, प्रशिक्षण, कोचिंग और अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करने के लिए दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी बात कही।
उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया संवाद’ सिर्फ खेलों पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि युवाओं के विचारों और महत्वाकांक्षाओं को देश के विकास के लक्ष्यों से जोड़ने का माध्यम है। युवाओं के सुझावों को स्पोर्ट्स इकोसिस्टम, टैलेंट डेवलपमेंट, गवर्नेंस और विकसित भारत के लिए नीतियां तैयार करने में शामिल किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हर सफलता के पीछे कठोर परिश्रम होता है। उन्होंने युवाओं से अपनी कमियों को दूर कर लगातार मेहनत करने और बुराइयों से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्त युवा ही विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नशामुक्त रहना स्वयं में देश को ताकत और मजबूती देने जैसा है।
अरुण साव ने युवाओं से असफलताओं से निराश नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि जीवन में कभी-कभी असफलता मिलती है, लेकिन इससे हताश होकर नशे की ओर बढ़ना समाधान नहीं है। नशा व्यक्ति को कमजोर करता है और उसके भविष्य को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने युवाओं से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता और सामर्थ्य के बल पर ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर तिलक वर्मा ने युवाओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि खेल व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से जूझना, दबाव का सामना करना, कौशल विकसित करना, टीम भावना और मानसिक स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण गुण सिखाता है। खेल के माध्यम से स्वास्थ्य, फिटनेस और पोषण के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है। उन्होंने कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने देश के लाखों युवाओं को खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
यूथ-आइकन डॉ. प्रियंका बिस्सा ने युवाओं से केवल सुझाव देने और पहल करने तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने इनिशिएटिव्स की जिम्मेदारी लेकर उनमें ओनरशिप की भावना के साथ काम करना चाहिए। नेतृत्व, शासन-प्रशासन और देश के विकास में युवाओं की सक्रिय एवं सशक्त भागीदारी जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को नशामुक्त रहने की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में एनआईटी के निदेशक डॉ. एन.वी. रमना राव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संचालक आकांक्षा शिक्षा खलखो, माय भारत के राज्य निदेशक अर्पित तिवारी सहित एनआईटी के प्राध्यापक, खिलाड़ी, विद्यार्थी और खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित ‘खेलो इंडिया संवाद’ के माध्यम से युवाओं को खेल, फिटनेस, नशामुक्ति, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में युवाओं के विचारों और सुझावों को विकसित भारत के लक्ष्य के साथ जोड़ने पर विशेष जोर रहा।




