कोरबा कबाड़ चोरी मामला: वकील कमलेश साहू पर गंभीर आरोप, पत्रकार को धमकी का ऑडियो वायरल, मानिकपुर चौकी में FIR दर्ज

कोरबा में अवैध कबाड़ चोरी के एक चर्चित मामले ने नया मोड़ ले लिया है। कबाड़ चोरी से जुड़े प्रकरण में अधिवक्ता कमलेश साहू का नाम सामने आने के बाद मामला और गरमा गया है। आरोप है कि उन्होंने अपने ही रिश्तेदार और कथित कबाड़ कारोबारी मुकेश साहू के खिलाफ खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को फोन पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का ऑडियो भी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, कोरबा पुलिस चौकी मानिकपुर में इस मामले को लेकर अपराध क्रमांक 366/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 और 351(2) के तहत FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश के बाद की गई।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ दिन पहले कोतवाली पुलिस ने मुकेश साहू के कबाड़ से लदे एक ट्रक को रोका था, लेकिन किसी कारणवश बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया। इस पर पत्रकार योगेश सलूजा ने खबर प्रकाशित की, जिससे नाराज होकर अधिवक्ता कमलेश साहू ने कथित रूप से पत्रकार को फोन कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया और धमकियां दीं।
मामला यहीं नहीं रुका। आरोप है कि कमलेश साहू पत्रकार को खोजते हुए मानिकपुर चौकी तक पहुंच गया और वहां भी दबाव बनाने की कोशिश की। पत्रकार को झूठे मामले में फंसाने और 2.5 लाख रुपये की मांग से जुड़ा FIR कराने की धमकी देने की भी बात सामने आई है। इस दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे।
डरे-सहमे पत्रकार ने उस समय रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई, लेकिन बाद में जब धमकी भरे कॉल का ऑडियो वायरल हुआ और मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तब जाकर FIR दर्ज की गई।
इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि मुकेश साहू पहले भी कबाड़ चोरी के मामलों में जेल जा चुका है। आरोप है कि कुछ समय पहले CSEB चौकी क्षेत्र में लगभग 60 मीटर लंबे लोहे के पुल को काटकर चोरी करने के मामले में वह 15 लोगों के साथ गिरफ्तार हुआ था। बाद में उसे जमानत पर रिहा कराया गया, जिसमें अधिवक्ता कमलेश साहू की भूमिका बताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कमलेश साहू पर पहले भी विवादित मामलों में संलिप्तता के आरोप लग चुके हैं। सीतामणी क्षेत्र में एक महिला द्वारा छेड़छाड़ का मामला दर्ज कराने की बात सामने आई थी। इसके अलावा सिविल न्यायालय पाली में फर्जी जमातदार पेश करने के मामले में उन्हें करीब दो महीने जेल में भी रहना पड़ा था।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑडियो वायरल होने के बाद प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आरोपों में कितनी सच्चाई साबित होती है।




