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कोयले से गैस बनाने की दिशा में कोल इंडिया का बड़ा दांव, 60 हजार करोड़ रुपये तक निवेश की तैयारी

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) कोयले के उपयोग में विविधता लाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनी कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) आधारित तीन प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें कुल निवेश 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इन परियोजनाओं के जरिए कोयले को गैस, रसायनों और सिंथेटिक ईंधन में परिवर्तित किया जाएगा।

सीआईएल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण परियोजना ओडिशा के लखनपुर में स्थापित की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 20,000 करोड़ रुपये है। यह परियोजना स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी और इसके लिए प्रारंभिक निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है। साइट पर ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं तथा पिछले छह-सात महीनों से तकनीकी प्रदाता वहां काम कर रहे हैं।

कंपनी की दूसरी परियोजना महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थापित की जाएगी, जिसे वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के सहयोग से विकसित किया जाएगा। वहीं तीसरी परियोजना पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में गेल के साथ साझेदारी में स्थापित करने की योजना है। दोनों परियोजनाओं के लिए फिलहाल तकनीकी प्रदाताओं के चयन की प्रक्रिया जारी है।

तीनों परियोजनियां कोयला गैसीकरण तकनीक पर आधारित होंगी, लेकिन इनके उत्पाद अलग-अलग होंगे। लखनपुर परियोजना में अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन किया जाएगा, जबकि चंद्रपुर और बर्दवान परियोजनाओं में सिंथेटिक नैचुरल गैस (SNG) तैयार की जाएगी, जो आयातित प्राकृतिक गैस का विकल्प बन सकती है।

सीआईएल घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार की तकनीकों का मूल्यांकन कर रही है। कंपनी के अनुसार, यूरोपीय और चीनी कंपनियों की तकनीकें भी विचाराधीन हैं। अधिकारी ने बताया कि चीन ने कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और उसके पास इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी होने के कारण सीआईएल को तकनीक चयन और खरीद प्रक्रिया में सरकारी नियमों का पालन करना पड़ता है।

कंपनी ने लखनपुर परियोजना को 2029-30 तक चालू करने का लक्ष्य रखा है, जबकि चंद्रपुर और बर्दवान परियोजनाओं के 2030-31 तक संचालन में आने की उम्मीद है। तकनीकी बोलियों को जून महीने में अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित ईंधन व रसायनों पर निर्भरता कम करने की केंद्र सरकार की रणनीति में कोयला गैसीकरण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने हाल ही में 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। यह पहल देश के विशाल कोयला भंडार के अधिक स्वच्छ और मूल्यवर्धित उपयोग को बढ़ावा देगी।

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