कचरे से भरे ट्रैक्टर पर स्वच्छता दीदियों को बैठाकर ले जाना पड़ा भारी, DSPM को नगर निगम का नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब

कोरबा, 29 अक्टूबर 2026। कचरे से भरे ट्रैक्टर पर स्वच्छता दीदियों को असुरक्षित तरीके से बैठाकर ले जाने और बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से कचरे का परिवहन करने के मामले में नगर पालिक निगम कोरबा ने सख्त रुख अपनाया है। निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल कंपनी मर्यादित (डीएसपीएम पूर्व) के मुख्य अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर लिखित जवाब मांगा है। निर्धारित समयसीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
दरअसल, मंगलवार को बुधवारी के समीप कचरे से लदे ट्रैक्टर पर स्वच्छता दीदियों को बैठाकर ले जाने का मामला सामने आया था। संबंधित ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी। कचरे के साथ सफाई कर्मचारियों को असुरक्षित तरीके से ले जाने की घटना ने कर्मचारियों की सुरक्षा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मीडिया में मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया।
निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई। जांच में संबंधित ट्रैक्टर डीएसपीएम सीएसईबी कोरबा के सफाई कार्य में संलग्न पाया गया। इसके बाद नगर निगम ने 28 अक्टूबर को डीएसपीएम के मुख्य अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
नगर निगम के अनुसार, डीएसपीएम का कार्यक्षेत्र बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आता है। ऐसे में आवासीय कॉलोनियों और औद्योगिक परिसरों से निकलने वाले कचरे का एकत्रीकरण, पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन और निपटान निर्धारित मापदंडों के अनुसार कराना संस्थान की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद खुले वाहन में कचरे का परिवहन करने, बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर का उपयोग करने और सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा की अनदेखी का मामला सामने आया है।
निगम ने नोटिस में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, श्रम कानूनों, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण और उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लेख किया है। निगम प्रशासन का कहना है कि सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी है।
नगर निगम ने डीएसपीएम प्रबंधन को तीन दिवस के भीतर पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित नियमों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।




