Chhattisgarh

अमृत भारत स्टेशन योजना: तीन साल बाद भी अधूरा कोरबा रेलवे स्टेशन, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

कोरबा, 06 अक्टूबर। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कोरबा रेलवे स्टेशन के कायाकल्प का काम शुरू हुए करीब तीन साल तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्टेशन का पुनर्विकास कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। रेलवे के गति शक्ति विभाग ने अमृत भारत स्टेशन योजना में शामिल स्टेशनों को लगभग डेढ़ साल में नए स्वरूप में विकसित करने का दावा किया था। इसके बावजूद कोरबा रेलवे स्टेशन का काम निर्धारित समय से काफी पीछे चल रहा है। निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण यात्रियों को स्टेशन परिसर में चल रहे विकास कार्यों के बीच से आवागमन करना पड़ रहा है।

जून 2023 में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कोरबा समेत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कई स्टेशनों पर एक साथ विकास कार्य शुरू किए गए थे। कोरबा के साथ बिलासपुर मंडल के रायगढ़, चांपा, अकलतरा, अंबिकापुर सहित अन्य स्टेशनों पर भी कार्य प्रारंभ हुआ था। इनमें से अधिकांश स्टेशनों का नए स्वरूप में लोकार्पण हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, जबकि कोरबा रेलवे स्टेशन का काम अभी भी अधूरा है।

रेलवे बोर्ड की ओर से कोरबा रेलवे स्टेशन के कायाकल्प के लिए 50 करोड़ रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इसके बावजूद निर्माण की धीमी गति को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी है। स्टेशन में निर्माण कार्य जारी रहने के कारण यात्रियों को कई स्थानों पर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

इसी तरह अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल के सात स्टेशनों पर दूसरे फुट ओवरब्रिज (FOB) के निर्माण के लिए कुल 42 करोड़ 79 लाख 80 हजार 303 रुपए 18 पैसे स्वीकृत किए गए थे। सभी स्टेशनों पर एफओबी का निर्माण 12 माह के भीतर पूरा किया जाना था। कोरबा रेलवे स्टेशन के नए एफओबी के लिए 6 करोड़ 11 लाख 40 हजार 43 रुपए 31 पैसे की राशि निर्धारित की गई है।

कोरबा स्टेशन पर दो सीढ़ियों की चौड़ाई वाले नए एफओबी का निर्माण शुरू हुए करीब दो माह हो चुके हैं, लेकिन यह कार्य भी अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब एफओबी जैसे कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, तो इसके निर्माण में भी देरी क्यों हो रही है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कुल 49 स्टेशन शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के 30, मध्य प्रदेश के नौ, महाराष्ट्र के आठ और ओडिशा के दो स्टेशन हैं। बिलासपुर मंडल के सात स्टेशनों में कोरबा भी शामिल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अन्य स्टेशनों के नए स्वरूप में तैयार होने के बाद अब कोरबा स्टेशन के काम में तेजी लाने की आवश्यकता है।

रेलवे स्टेशन में पदस्थ एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि पिछले करीब तीन वर्षों की कार्य अवधि को देखा जाए तो लगातार डेढ़ वर्ष भी प्रभावी रूप से काम नहीं हुआ। अधिकारी के अनुसार, निर्माण कार्य कर रही अनुबंधित कंपनी के पास पर्याप्त मैनपावर नहीं होने के कारण काम की गति प्रभावित हुई है। सीमित कर्मचारियों के साथ काम शुरू किया गया, लेकिन कई बार काम अधूरा छोड़ दिया गया। वर्तमान स्थिति को देखते हुए स्टेशन के पूर्ण कायाकल्प में अभी और समय लगने की संभावना है।

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