हमने सेवा का धर्म अपनाया है,सेवाधर्म सबसे कठोर है – राजेश्री महन्त रामसुंदर दास

- यादव परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ जांजगीर में शामिल हुए महामंडलेश्वर
जांजगीर, 30 सितम्बर । मुझे इस कार्यक्रम में आज से तीन दिन पहले उपस्थित होना था लेकिन कुछ ऐसा कार्य आ गया जिसके कारण निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हो सका किंतु आज समय निकालकर रायपुर से सीधे चलकर आप सभी के बीच उपस्थित हुआ हूं ।यह बातें महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास ने जांजगीर में यादव परिवार द्वारा अपने निज निवास में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रोताओं को संबोधित करते हुए उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि हमने जीवन में सेवा का धर्म अपनाया है सेवा का धर्म सबसे कठोर है श्री रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने यहां तक लिखा है कि- सिर भर जाऊं उचित अस मोरा। सब ते सेवक धरम कठोरा।। अर्थात पैर की तो बात ही क्या ? यदि मैं सिर के बल चलते जाऊं तो भी सेवा का कार्य पूरा नहीं होगा।

लोगों को व्यास पीठ पर विराजित आचार्य दुर्गा प्रसाद चतुर्वेदी ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की कथा सुनाते हुए कहा कि -हम सब के बीच में महराज रामसुंदर दास का आगमन हुआ है भले ही मैं व्यास पीठ पर बैठा हूं किंतु गुरु के सामने शिष्य बोल नहीं सकता! जो कुछ भी बोल रहा हूं यह उनका ही आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर संत भगवान के चरण कमल पड़ जाते हैं, जहां उनके चरण रज मिल जाता है वह स्थान बंदिनीय हो जाता है। आयोजक परिवार ने पुष्पमाला, वस्त्र, नारियल भेंट कर चरण कमल पखार करके परम पूज्य महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर विशेष रूप से कमलेश सिंह, प्रमोद सिंह, डी एस यादव, आशीष यादव, जगदीश प्रसाद यादव, नर्मदा प्रसाद यादव, चंद्रशेखर यादव, सूरज प्रकाश यादव, चंद्र प्रकाश, दशरथ प्रसाद यादव, राधेश्याम गुप्ता, कृष्ण कुमार यादव, लक्ष्मी भोई, शत्रुघन यादव, मिडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, हर्ष दुबे सहित अनेक गणमान्य नागरिक गण उपस्थित थे। राजेश्री महन्त जी महाराज अपने प्रवास के दौरान फुलवारी शिवरीनारायण तथा साहड़ा (पलारी) के दुर्गोत्सव में भी सम्मिलित हुए।




