Chhattisgarh

सैलरी एडवांस दिलाने का झांसा देकर प्रधान आरक्षक से 8.50 लाख रुपये की साइबर ठगी

कोरबा, 03 नवंबर 2026। साइबर अपराधों से बचाव के लिए पुलिस विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन इसके बावजूद लोग ऑनलाइन ठगी के जाल में फंस रहे हैं। ताजा मामला कोरबा का है, जहां सैलरी एडवांस दिलाने का झांसा देकर 11वीं वाहिनी में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक से 8.50 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई। आरोपित ने मोबाइल फोन पर संपर्क कर पहले भरोसे में लिया और फिर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। मामले में साइबर थाना पुलिस ने मोबाइल नंबर धारक और उसके अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रथराम सिदार निवासी पुलिस लाइन कोरबा वर्तमान में 11वीं वाहिनी की सी-कंपनी में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि 29 अक्टूबर 2026 को एक मित्र के माध्यम से उन्हें सैलरी एडवांस प्राप्त करने की जानकारी मिली थी। घरेलू जरूरतों के लिए करीब आठ लाख रुपये की आवश्यकता होने पर उन्होंने सैलरी एडवांस ऐप के माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान ऐप के कथित कस्टमर केयर के जरिए उनकी बातचीत चन्दन कुमार नामक व्यक्ति से हुई।

उसने सैलरी एडवांस दिलाने का भरोसा देकर मोबाइल पर अलग-अलग ऐप डाउनलोड करवाए और बैंकिंग प्रक्रिया पूरी कराई। शुरुआत में आठ लाख रुपये का एडवांस स्वीकृत होने की बात कही गई, लेकिन बाद में आरोपित ने बताया कि गलती से उनके खाते में दस लाख रुपये भेज दिए गए हैं। उसने आठ लाख रुपये का नया आवेदन स्वीकृत कराने के लिए पहले रकम वापस करने की शर्त रखी।

इसके बाद 29 अक्टूबर को वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क कर प्रधान आरक्षक को एसबीआई की योनो ऐप चालू कराने के लिए बैंक जाने को कहा गया। उसके निर्देश पर रथराम सिदार एसबीआई बैंक, आईटीआई रामपुर पहुंचे और योनो ऐप सक्रिय कराया। इसके बाद बैंक के बाहर से बताए गए खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।

शिकायत के मुताबिक, उसी दिन दोपहर करीब 12.59 बजे यस बैंक के एक खाते में 4.50 लाख रुपये तथा दोपहर 3.39 बजे करूर वैश्य बैंक में मोहम्मद मोसिन के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से चार लाख रुपये भेजे गए। इस प्रकार कुल 8.50 लाख रुपये आरोपितों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

रकम भेजने के बाद भी कथित आरोपी ने और पैसे जमा करने के लिए कहा। इस पर प्रधान आरक्षक को संदेह हुआ और उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर अपराध हेल्पलाइन एवं पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल साइबर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपितों की पहचान करने में जुटी है।

Related Articles

Back to top button