Chhattisgarh

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा जनजाति पर लिखी पुस्तक का राज्यपाल ने किया विमोचन, कोरबा की व्याख्याता विमला भास्कर को मिली बड़ी उपलब्धि

कोरबा। जिले के हाईस्कूल पाताड़ी में पदस्थ अंग्रेजी विषय की व्याख्याता श्रीमती विमला भास्कर ने शिक्षा एवं जनजातीय शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र मानी जाने वाली पहाड़ी कोरवा जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा और शासकीय योजनाओं पर आधारित उनकी शोधपरक पुस्तक “पहाड़ी कोरवा विद्यार्थी शिक्षा एवं शासकीय योजनाएं (राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में)” का विमोचन राजभवन रायपुर में राज्यपाल रामेन डेका के करकमलों से किया गया। इस अवसर पर मंत्रालय रायपुर के विशेष सुरक्षा अधिकारी टंकेश्वर लहरे भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

यह पुस्तक पहाड़ी कोरवा जनजाति के विद्यार्थियों की शिक्षा, सामाजिक परिस्थितियों और उनके लिए संचालित शासकीय योजनाओं के प्रभाव का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में तैयार यह शोध कार्य जनजातीय शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी दस्तावेज माना जा रहा है।

श्रीमती विमला भास्कर लंबे समय से शिक्षा और सामाजिक शोध के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज के समग्र विकास और व्यक्ति के सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। वे मानती हैं कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन समाज के विकास को नई गति देता है।

उन्होंने इससे पहले भी पहाड़ी कोरवा जनजाति विषय पर एम.एड. के लिए शोधग्रंथ प्रस्तुत किया है। अंग्रेजी विषय की व्याख्याता होने के साथ-साथ उन्होंने राजनीति विज्ञान में भी प्रथम श्रेणी से उपाधि प्राप्त की है। वर्ष 2019 में उन्होंने अंग्रेजी साहित्य विषय में सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए आयोजित SET (State Eligibility Test) परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। वे एक सफल शिक्षिका होने के साथ-साथ शोध अध्येता और लेखिका के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

इस शोधपरक पुस्तक की भूमिका राजनीति विज्ञान के प्रख्यात विद्वान एवं जे.बी.डी. कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, कटघोरा के प्राचार्य प्रो. प्यारेलाल आदिले ने लिखी है। पुस्तक में जनजातीय शिक्षा, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है।

हाल ही में डॉ. अंबेडकर एजुकेशन पे बैक टू सोसाइटी द्वारा जांजगीर में आयोजित प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह एवं करियर काउंसलिंग कार्यक्रम में भी इस पुस्तक की प्रतियां विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों को भेंट की गई। इनमें अपर कलेक्टर एस.पी. वैद्य, सेवानिवृत्त आईएएस दिलीप वासनिकर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी गोकुल रावटे, डिप्टी कलेक्टर सत्येंद्र बंजारे, एसडीएम पवन कोसमा, सिविल सर्जन डॉ. ब्रिजमोहन जागृति, डॉ. धनेश्वरी जागृति, उप जिलाधीश शशि कुमार चौधरी, समाजसेवी सारंग हुमने, प्रो. प्यारेलाल आदिले, तहसीलदार अविनाश चौधरी, पशु चिकित्सा अधिकारी एस.एल. आग्रे, अधीक्षण यंत्री रमन नेताम, नायब तहसीलदार वेंकटेश मार्बल, प्राचार्य बी.आर. रत्नाकर, डॉ. कुंज किशोर, डॉ. मनोज कुमार प्रधान और डॉ. फिरत राम सारथी सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे।

श्रीमती विमला भास्कर को उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने शुभकामनाएं एवं बधाई दी है। बधाई देने वालों में उनके पति एवं पोस्टमास्टर जी.एल. भास्कर, जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग, टी.आर. महिलांगे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्रीकांत कसेर, सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त एन.के.एस. दीक्षित, प्राचार्य डॉ. राकेश श्रीवास्तव, राकेश टंडन, संजय पाटले, महेंद्र रात्रे, चुन्नी महिलांगे, राजेश्वरी आदिले, अंजलि डहरिया, राजकुमारी डहरिया, व्याख्याता घनश्याम भास्कर, टी.एल. मिर्जा तथा हाईस्कूल पाताड़ी के प्राचार्य पी. पार्कर सहित अनेक शिक्षकों, अधिकारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

शिक्षा और जनजातीय शोध के क्षेत्र में यह उपलब्धि न केवल कोरबा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय मानी जा रही है। पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समुदाय की शिक्षा और विकास पर केंद्रित यह पुस्तक भविष्य में शोधार्थियों, शिक्षकों, नीति-निर्माताओं और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री साबित हो सकती है।

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