रायपुर में गणेशोत्सव की खास तैयारी: बांस, पूजा सामग्री, मोती और दालों से बन रहीं अनोखी गणेश प्रतिमाएं, 3 महीने तक चला निर्माण

रायपुर, 11 सितम्बर। गणेशोत्सव को लेकर राजधानी रायपुर में तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। इस बार गणेश भगवान की पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं के साथ-साथ अलग-अलग थीम और अनोखी सामग्री से तैयार की जा रही खास मूर्तियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। रायपुर के मूर्तिकार ग्राहकों की पसंद, उनके आइडिया और थीम के अनुसार गणेश प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इनमें बांस, पूजा सामग्री, मोती, रुद्राक्ष, मौली धागा, धूप-अगरबत्ती के साथ-साथ मसूर दाल, चना और भुट्टे जैसी खाद्य सामग्री से तैयार की गई प्रतिमाएं शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ प्रतिमाओं को तैयार करने में करीब तीन महीने तक का समय लगा है।
रायपुरा निवासी राहुल यादव का परिवार करीब 30 वर्षों से गणेश प्रतिमाएं बनाने का काम कर रहा है। राहुल यादव और उनका परिवार इस बार भी गणेशोत्सव के लिए अलग-अलग कॉन्सेप्ट पर प्रतिमाएं तैयार कर रहा है। उनका कहना है कि कई ग्राहक अपनी पसंद की थीम और डिजाइन पहले से बताते हैं। इसके बाद उसी आइडिया में मूर्तिकार अपनी क्रिएटिविटी और डिजाइन को शामिल कर प्रतिमा तैयार करते हैं। खास थीम वाली प्रतिमाएं सीमित संख्या में बनाई जाती हैं और इनके लिए समितियां व ग्राहक कई महीने पहले ही ऑर्डर दे देते हैं।
इस बार बांस से तैयार की गई गणेश प्रतिमा सबसे अलग कॉन्सेप्ट में शामिल है। इस प्रतिमा में सामान्य मिट्टी का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसे लकड़ी, पेपर और बांस की बारीक कटिंग से तैयार किया गया है। मूर्तिकार के मुताबिक इस प्रतिमा पर करीब तीन महीने से काम चल रहा था। बांस को पहले छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा गया और फिर एक-एक हिस्से को जोड़कर गणेश प्रतिमा का आकार दिया गया। बांस की ऊपर की छाल हटाकर उसे आवश्यक आकार में तैयार किया गया। इसके बाद अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर प्रतिमा को अंतिम रूप दिया गया। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब 40 से 50 हजार रुपए की लागत आई है।

मूर्तिकारों के मुताबिक बांस से गणेश प्रतिमा तैयार करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण काम है, क्योंकि बांस की कटिंग और उसे सही आकार में लगाना काफी मेहनत वाला काम है। हालांकि तैयार होने के बाद यह प्रतिमा बेहद हल्की होती है। इस तरह की विशेष प्रतिमाएं सीमित संख्या में तैयार की जाती हैं और इन्हें मुख्य रूप से प्री-ऑर्डर पर बनाया जाता है।
रायपुर में पूजा सामग्री से तैयार की गई गणेश प्रतिमा भी इस बार खास आकर्षण का केंद्र है। इस प्रतिमा का मूल आकार नारियल की जूट से तैयार किया गया है। इसके अलावा धोती में जनेऊ लगाया गया है, जबकि माला बनाने के लिए कमल गट्टे का इस्तेमाल किया गया है। प्रतिमा की सजावट में रुद्राक्ष और मौली धागे का भी उपयोग किया गया है। वहीं मोतियों से भी विशेष गणेश प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। मूर्तिकार के अनुसार मोतियों से बनी प्रतिमाएं गणेशोत्सव के साथ-साथ गृह प्रवेश या किसी खास अवसर पर उपहार देने के लिए भी तैयार कराई जाती हैं।

इस बार धूप-अगरबत्ती के प्रोडक्ट से तैयार की गई 12 फीट की गणेश प्रतिमा भी चर्चा में है। इस प्रतिमा को तैयार करने में करीब तीन महीने का समय लगा है। इसमें अलग-अलग रंगों की धूप स्टिक का इस्तेमाल किया गया है। गीली धूप से माला, पुष्प और कड़े जैसी सजावटी आकृतियां तैयार की गई हैं। संबंधित समिति ने मूर्तिकार को अपनी पसंद का स्ट्रक्चर और डिजाइन बताया था, जिसके आधार पर प्रतिमा को तैयार किया गया।
मूर्तिकार का कहना है कि पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं की तुलना में धूप-अगरबत्ती जैसी सामग्री से प्रतिमा बनाना कई मामलों में आसान होता है। ऐसी प्रतिमाएं अपेक्षाकृत हल्की होती हैं और निर्माण के दौरान उन्हें जरूरत के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर अलग-अलग हिस्सों पर काम किया जा सकता है।

खास बात यह भी है कि गणेश प्रतिमाओं में इस बार खाने की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया है। मसूर दाल, चना और भुट्टे से गणेश प्रतिमा तैयार की गई है। अलग-अलग खाद्य सामग्रियों को सजाकर और व्यवस्थित तरीके से जोड़कर भगवान गणेश का आकार दिया गया है। पारंपरिक मिट्टी से अलग होने के कारण यह प्रतिमा भी लोगों के बीच आकर्षण का विषय बनी हुई है।
रायपुरा निवासी शिवचरण यादव का परिवार करीब तीन दशक से गणेश प्रतिमाएं बनाने के काम से जुड़ा है। परिवार के दोनों बेटे भी पिछले करीब 15 वर्षों से अपने पिता के साथ इस काम में सहयोग कर रहे हैं। परिवार को गणेश प्रतिमाओं के लिए लंबे समय से समितियों के ऑर्डर मिलते रहे हैं। रामसागर पारा की एक गणेश उत्सव समिति पिछले करीब 17 वर्षों से उनके परिवार से प्रतिमा बनवा रही है।
मूर्तिकार परिवार के मुताबिक खास थीम और डिजाइन वाली प्रतिमाओं के ऑर्डर सीमित संख्या में ही लिए जाते हैं। समितियां आमतौर पर गणेशोत्सव से करीब तीन महीने पहले अपनी पसंद का डिजाइन और स्ट्रक्चर बताकर ऑर्डर देती हैं। इसके बाद उसी के अनुसार प्रतिमा तैयार की जाती है। इस बार बांस, पूजा सामग्री, मोती, धूप-अगरबत्ती और खाद्य सामग्री जैसी अलग-अलग चीजों से तैयार गणेश प्रतिमाएं न केवल मूर्तिकारों की रचनात्मकता को दिखा रही हैं, बल्कि गणेशोत्सव में कुछ नया और अनोखा करने की चाह रखने वाली समितियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।




