Chhattisgarh

रायगढ़ के केराझरिया जंगल में दलदल में फंसकर हाथी शावक की मौत, एक साल में 12वीं मौत से उठे संरक्षण पर सवाल

रायगढ़/धर्मजयगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक बेहद दुखद और चिंताजनक मामला सामने आया है। छाल रेंज अंतर्गत केराझरिया जंगल में लगभग पांच माह के एक हाथी शावक की दलदल में फंसने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में संवेदनशील माहौल बन गया, वहीं लगातार हो रही हाथियों की मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक हाथियों का एक दल केराझरिया जंगल क्षेत्र में विचरण कर रहा था। इसी दौरान एक शावक दलदली क्षेत्र में फंस गया। बताया जा रहा है कि शावक काफी देर तक बाहर निकलने के लिए संघर्ष करता रहा, लेकिन दलदल में धंसते जाने के कारण वह खुद को बचा नहीं सका। घटना के बाद हाथियों का झुंड लंबे समय तक मौके के आसपास मंडराता रहा। हाथियों की बेचैनी और शावक को बचाने की कोशिशों को देखकर ग्रामीणों में भी भावुक माहौल बन गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र में कई जगह दलदली इलाके मौजूद हैं, जहां बरसात और नमी के कारण जमीन बेहद खतरनाक हो जाती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और निगरानी नहीं होने के कारण वन्यजीव अक्सर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

गौरतलब है कि रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में पिछले एक वर्ष के भीतर अब तक 12 हाथी शावकों की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ रही मौतों ने वन विभाग की तैयारियों और हाथी संरक्षण की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके सुरक्षित आवागमन, भोजन और रहवास के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में प्राकृतिक संसाधनों की कमी, पेड़ों की कटाई और मानव हस्तक्षेप बढ़ने से हाथियों का प्राकृतिक मार्ग प्रभावित हो रहा है। यही कारण है कि हाथियों का रिहायशी इलाकों की ओर रुख बढ़ रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से हाथी कॉरिडोर विकसित करने, संवेदनशील और दलदली क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने तथा वन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और वैज्ञानिक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में हाथियों और इंसानों दोनों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

इधर स्थानीय ग्रामीणों ने भी वन विभाग से जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, हाथियों की गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने और हादसों को रोकने के लिए स्थायी योजना बनाने की मांग की है। लगातार हो रही हाथियों की मौतों से क्षेत्र में चिंता का माहौल है।

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