Chhattisgarh

मसि कागद छुओ नहीं, कलम गही नहिं- हाथ : राजेश्री महन्त

  • सतगुरु कबीर सेवा निकेतन सक्ती के वार्षिक संत समागम समारोह में सम्मिलित हुए महामंडलेश्वर

छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास सदगुरु कबीर सेवा निकेतन सक्ती में आयोजित वार्षिक संत समागम समारोह के शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित हुए। यह कार्यक्रम 22 फरवरी से 24 फरवरी 2026 तक आयोजित है। यहां पहुंचने पर आश्रम के सभी संत महात्माओं ने श्रद्धा- भक्ति पूर्वक उनकी अगवानी की। कार्यक्रम का शुभारंभ फीता काटकर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

अतिथियों के स्वागत के पश्चात उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए राजेश्री महन्त रामसुंदर दास ने कहा कि-कबीर साहेब ने किसी स्कूल या महाविद्यालय में शिक्षा ग्रहण नहीं किया यहां तक कि वे साक्षर भी नहीं थे किंतु उनकी वाणी में इतनी आध्यात्मिकता है कि संसार के सर्वाधिक पढ़े-लिखे लोग भी उस पर शोध कर रहे हैं। वस्तुत: ज्ञान परमात्मा की देन होती है। कबीर साहेब ने स्वयं लिखा है कि – मसि कागद छुओ नहीं, कलम गही नहिं हाथ। चार जुगों की वार्ता। मुख ही जनाई बात।। वे जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य महाराज की शिष्य परंपरा से थे इस बात का उल्लेख उन्होंने स्वयं ही किया है – हम कासी में प्रकट भये हैं। रामानंद चेताये।। अर्थात काशी में इनका जन्म हुआ और इन्होंने श्री स्वामी रामानंदाचार्य जी महाराज से ज्ञान की प्राप्ति की उन्हें अपना गुरु माना !

कार्यक्रम में पूर्व मंत्री नोबेल वर्मा, कबीर आश्रम खरसिया से महेश्वर साहेब, सक्ती आश्रम के महंत एवं कार्यक्रम के आयोजक कबीर शरण साहेब सहित अन्य स्थानों से आए हुए संत महात्मा एवं श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित थे। यह कार्यक्रम 24 फरवरी तक आयोजित है।

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