बिलासपुर में अनंत रियल्टी पर टाउन प्लानिंग का शिकंजा, विकास अनुज्ञा निरस्त; स्वीकृत नक्शे में 60 की जगह 90 प्रकोष्ठों का मामला

बिलासपुर, 10 सितंबर 2026। बिलासपुर के अज्ञेय नगर स्थित बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने बड़ी कार्रवाई की है। संचालनालय ने मेसर्स अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को निरस्त कर दिया है। यह विकास अनुज्ञा 25 जून 2025 को जारी की गई थी। भागीदार नमन गोयल के माध्यम से जारी अनुमति को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 25 के तहत प्रतिसंहृत किया गया है।
मामले में संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, बिलासपुर की ओर से विकास अनुज्ञा निरस्त करने का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद संबंधित संस्था को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। 31 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान संस्था ने 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद नमन गोयल ने 7 अगस्त को उपस्थित होकर अपना जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रकरण की जांच समिति ने दस्तावेजों और जवाब का परीक्षण किया और 24 अगस्त को मामले में उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा की।
जांच में सामने आई प्रमुख विसंगतियों में प्रोजेक्ट तक पहुंच मार्ग के लिए इस्तेमाल की जा रही भूमि का मामला शामिल है। आदेश के अनुसार जिस भूमि का उपयोग पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था, वह पूर्व में स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा थी और सामान्य सार्वजनिक मार्ग नहीं थी। जांच समिति ने माना कि इस भूमि को नए विकास में शामिल करने से पहले पूर्व स्वीकृत अभिन्यास में नियमानुसार संशोधन किया जाना जरूरी था। समिति के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना उक्त भूमि का उपयोग नए विकास के लिए किया गया।
मामले में दूसरी बड़ी आपत्ति स्वीकृत मानचित्र में प्रकोष्ठों की संख्या को लेकर सामने आई। विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉक प्रस्तावित थे। प्रत्येक ब्लॉक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ स्वीकृत किए गए थे। हालांकि, स्वीकृत मानचित्र में कुछ स्थानों पर छह तल दर्शाए गए। इससे प्रकोष्ठों की संख्या 60 के बजाय 90 तक पहुंचती है। आदेश में माना गया कि इस अंतर का सीधा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए निर्धारित प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ता है।
अनंत रियल्टी की ओर से मानचित्र में संख्या संबंधी अंतर को सलाहकार द्वारा हुई लिपिकीय नंबरिंग की गलती बताया गया। हालांकि, जांच समिति ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया। समिति ने अपने परीक्षण में कहा कि स्वीकृति से पहले अभिन्यास पर आवेदक के हस्ताक्षर होते हैं, इसलिए उसमें दर्ज विवरण की जिम्मेदारी से संस्था पूरी तरह अलग नहीं हो सकती। इसी आधार पर संस्था का जवाब संतोषजनक नहीं माना गया।
अंतिम आदेश में संचालनालय ने विकास अनुज्ञा की शर्तों के उल्लंघन और प्रस्तुत जवाबों को असंतोषजनक पाए जाने के बाद विकास अनुज्ञा को निरस्त करने का निर्णय लिया। कार्रवाई के बाद मामले से जुड़े दस्तावेज आवास एवं पर्यावरण विभाग, बिलासपुर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG RERA), अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश और उप पंजीयक सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे गए हैं।
वहीं, जांच प्रक्रिया से परिचित उच्च पदस्थ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं में भी कई सवाल सामने आए। इनमें कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए आर्किटेक्ट की वैधता, EWS/LIG दायित्वों से संबंधित शपथ-पत्र, पहुंच मार्ग की चौड़ाई, पार्किंग और ओपन स्पेस से जुड़े विवरण शामिल हैं। सूत्रों ने स्वीकृति प्राप्त करने के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को कथित तौर पर छिपाने अथवा गलत ढंग से प्रस्तुत किए जाने का भी दावा किया है। हालांकि, इन सभी बिंदुओं को तीन पृष्ठ के अंतिम निरस्तीकरण आदेश में स्वतंत्र निष्कर्ष के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। इसलिए इनका उल्लेख आधिकारिक सूत्रों के दावे के तौर पर किया जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद अज्ञेय नगर स्थित अनंत रियल्टी के बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट की स्वीकृतियों और निर्माण से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से आगे क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर बनी हुई है।




