बिनोद मिल परिसर के रहवासियों का प्रदर्शन: 1नवंबर तक मकान खाली करने का वक्त ,सीएम से गुहार

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36 मिनट पहले
बिनोद मिल परिसर में रहने वाले श्रमिकों के 130 परिवारों को राजस्व विभाग द्वारा नोटिस जारी करने के बाद शनिवार को रहवासियों ने चामुंडा चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला पुरुष ने प्रदर्शन करते हुए मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान से रहवासियों के घरो को मालिकाना हक़ देने का वादा याद दिलाते हुए गुहार लगाई है।
विनोद मिल श्रमिक के परिवारों वाले मकानो पर बेदखल करने के लिए चस्पा हुए नोटिस को लेकर आक्रोश में दिखें। आक्रोशित परिवार ने सुबह 11 बजे चामुंडा माता मंदिर चौराहा पर प्रदर्शन किया। मामले में राज्य सरकार पर मनमानी का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज कराया। क्षेत्रिय नागरिकों के बताया विगत दिनों मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को ज्ञापन दिया था। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि पहले वैकल्पिक स्थान दिलवाया जाएगा उसके पश्चात कार्रवाई की जाएगी लेकिन इसी बीच 3 दिन में अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया है। इस क्षेत्र में करीब 150 परिवार रहते है। प्रदर्शन कर रही महिला ने कहा की हम यही मर जाएंगे लेकिन किसी भी किमत पर घर नहीं छोड़ेंगे।
एक नव. तक मकान खाली करने का वक़्त
प्रशासन की और अब जल्द ही रहवासियों से घर खाली कराए जाएंगे। तहसीलदार राधेश्याम पाटीदार ने बताया कि नोटिस में सभी को 1 नवंबर तक मकान खाली करने का वक्त दिया है। इसके बाद जैसे आदेश होंगे, वैसी कार्रवाई की जाएगी।
अब तक ये हुआ
वर्ष 1996 में कपड़ा बनाने वाली विनोद मिल बंद हो गई थी। इसके अगले ही साल मजदूरों ने अपना बकाया वेतन, ग्रेच्युटी आदि का पैसा पाने के लिए कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। वर्ष 2017 में हाईकोर्ट और फिर 27 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने मिल मजदूरों के हक में फैसला सुनाया था। जिसमें मध्यप्रदेश सरकार 27 फरवरी 2020 तक मिल मजदूरों को उनकी बकाया राशि का भुगतान 4 फीसद ब्याज के साथ करें। शासन को मिल की 18.018 हेक्टेयर (44.523 एकड़) जमीन का आधिपत्य भी सौंपा गया था। फैसले के बाद शासन ने अस्पताल के लिए 4900 वर्ग मीटर जमीन छोड़ शेष जमीन नीलामी करने का प्रयास किया। नीलामी के लिए जमीन के पार्सल के रूप में 9 टुकड़े किए। पार्सल क्रमांक 8 और 9 आसानी से 19 करोड़ 40 लाख रुपये में बिक गया। पार्सल क्रमांक 6 वाली 22,245 वर्ग मीटर जमीन, जिसकी न्यूतनम बोली 91 करोड़ 3 लाख रुपये थी, पिछले साल तीन बार निविदा निकालने पर भी नहीं बिकी।
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