बाघों की संख्या में लगातार इजाफा: 6 महीने में 28 बार तेंदुए-बाघ ने किया इंसानों पर हमला, अब हिफाजत के लिए बन रहा प्लान

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भोपाल7 मिनट पहले
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प्रदेश में तेंदुआ और बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब बाघ और तेंदुओं को जंगल से खदेड़ दे रहे हैं। नतीजे में वे जंगलों से निकलकर खेतों या आबादी वाले इलाकों में आकर भटक रहे हैं। इसके चलते प्रदेश में बाघ, तेंदुआ और इंसानों के बीच पिछले 6 महीने में संघर्ष की 28 घटनाएं हो चुकी हैं। अब वन विभाग इंसानों और मवेशियों की हिफाजत के लिए लॉन्ग टर्म मैनेजमेंट एक्शन प्लान बनाकर जंगल क्षेत्रों में काम कर रहा है।
प्रदेश भर में पिछले छह माह में तेंदुआ और बाघ के इंसानों पर हमला करने के नए-नए मामले सामने आने के बाद वन विभाग ने सभी वन डिवीजनों, टाइगर रिजर्व और सेंचुरी को दिशा- निर्देश जारी किए हैं। उसने पाया है कि बाघ की अपेक्षा तेंदुओं के साथ इंसानी संघर्ष ज्यादा बढ़ा है।
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2018 की गणना में सबसे ज्यादा तेंदुए प्रदेश में पन्ना तहसील व छतरपुर के इलाके में पाए गए थे। इनकी संख्या तकरीबन 150 थी। टाइगर रिजर्व के अलावा सेंचुरी और विभिन्न वन डिवीजन में बाघ व तेंदुओं की संख्या बढ़ी है।
लोगों को सतर्क करने का अभियान
वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल के अंदर रहने वाले ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए अभियान चला रहे हैं। बीट गार्ड ऐसे गांवों में जाकर लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे रात में अकेले न निकलें। लोगों को जंगल में न जाने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि तेंदुआ धोखे से वार करता है।
बाघ-तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सभी वन डिवीजन, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट के लॉन्ग टर्म मैनेजमेंट एक्शन प्लान बनाकर काम कर रहे हैं, ताकि इंसानों और बाघ-तेंदुओं के बीच संघर्ष को राेका जा सके। -शुभरंजन सेन, एपीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ मुख्यालय
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