नेपाल में फिर मंडराया भीषण बाढ़ का खतरा, ल्हेंदे नदी में बनी झील टूटने की आशंका

काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ की तबाही के बीच अब एक और बड़ी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। चीन ने जानकारी दी है कि रसुवागढ़ी बॉर्डर से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंदे नदी में पानी का प्रवाह रुकने से एक झील बन गई है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण इसके टूटने की आशंका जताई जा रही है। झील के टूटने की स्थिति में भोटेकोशी नदी में एक बार फिर अचानक तेज बाढ़ आ सकती है, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही का खतरा है।
नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे से दूर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, पानी रुकने से बनी यह झील करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है।
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन सेंट्रल टेलीविजन ने बताया है कि अगले 72 घंटों में झील में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने की संभावना है। इससे झील के टूटने का खतरा और बढ़ गया है। यह झील नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी है। विशेषज्ञों की निगरानी के बीच नेपाल और चीन की एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
इससे पहले आई भीषण बाढ़ में अब तक 359 लोगों की मौत हो चुकी है। आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 132 शव चितवन और 82 शव पूर्वी नवलपरासी जिले में मिले हैं। करीब 1,500 लोगों के लापता होने की सूचना है। लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है।
बाढ़ के दौरान कई इलाकों में हालात इतने भयावह थे कि करीब 30 फीट ऊंची पानी की लहरें उठती देखी गईं। जान बचाने के लिए लोगों को अपने घरों की तीसरी और चौथी मंजिल तक जाना पड़ा। अचानक आई बाढ़ ने बड़ी संख्या में घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य जारी है।
त्रिशूली नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद बचावकर्मी अर्थमूवर मशीन की मदद से एक महिला को सुरक्षित स्थान पर ले जाते हुए।




