नशेड़ी वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई: अक्टूबर में ड्रिंक एंड ड्राइव के 122 केस; गांजा, स्मैक का एक भी नहीं, क्योंकि जांच ही नहीं होती

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सागर43 मिनट पहलेलेखक: राजकुमार प्रजापति

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नशे में वाहन चलाने पर हादसे का 90 प्रतिशत जाेखिम रहता है। - Dainik Bhaskar

नशे में वाहन चलाने पर हादसे का 90 प्रतिशत जाेखिम रहता है।

नशे में वाहन चलाने पर हादसे का 90 प्रतिशत जाेखिम रहता है। अपनी जान के साथ दूसराें की जान खतरे में डालने वाले नशेड़ी वाहन चालकाें के खिलाफ पुलिस कार्रवाई में भी बड़ा झाेल है। शराब पीकर वाहन चलाने वालाें काे ताे ब्रीद एनालाइजर के जरिए पकड़ना आसान है, लेकिन गांजा, भांग, स्मैक जैसे मादक पदार्थ का सेवन कर वाहन दाैड़ाने वालाें पर पुलिस शिकंजा कसने की स्थिति में नहीं है। ऐसा काेई यंत्र ही नहीं है जिससे कि इन मादक पदार्थाें के सेवन की माैके पर ही पुष्टि की जा सके।

इसी का फायदा उठाते हुए सागर की सड़काें पर गंजेड़ी भी नशे में धुत हाेकर वाहन दाैड़ा रहे हैं। उड़ीसा से गांजे की तस्करी में सागर भी एक पड़ाव है। ट्रेन, बस व निजी वाहनाें से गांजे की खेप पकड़ी जाती रही है। खेताें में गांजे की फसलें लहलहा रही हैं। भांग की गाेली चाय-पान की दुकानाें पर उपलब्ध है।

एक महीने में सभी केस शराबियाें पर ही बनेे

पिछले महीने हेलमेट चेकिंग अभियान के दाैरान सागर की सड़काें पर पुलिस की सख्ती दिखाई दी। इस दाैरान धारा 185 के तहत ड्रिंक एंड ड्राइव के भी केस बने। जिले में 122 केस शराब के नशे में वाहन चलाने वालाें के खिलाफ बनाए गए हैं। अक्टूबर 2022 में ट्रैफिक पुलिस द्वारा 83, शहर के थानाें में 13 और देहात के थानाें में 26 केस शराब पीकर वाहन चलाने वालाें के खिलाफ बने। शराब के साथ युवाओं में महानगराें की तर्ज पर दूसरे नशे का घातक शाैक भी बढ़ रहा है। गांजा आए दिन पकड़ा जा रहा है। पैकेट में मिलने वाली भांग की गाेली का सेवन कर रहे हैं। प्रतिबंधित दवा टेन की गाेली का भी कम उम्र के लड़के उपयाेग कर रहे हैं।

हादसे- जब लाेगाें की जान पर बन आई

  • जुलाई 2022 – सागर-बंडा रोड पर नशे में धुत कार चालक वाहनों को टक्कर मारते हुए टेंट हाउस की दुकान में जा घुसा। इसी दौरान कार ने स्कूटी सवार युवक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक का पैर कट गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
  • अक्टूबर 2022- मकरोनिया- रोड पर शंकरगढ़ के पास एक ट्रक बेकाबू होकर मकान में घुस गया। इस हादसे में मकान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। ड्राइवर नशे में था।

लाइसेंस निलंबन का प्रावधान पर कार्रवाई कम

नशे में वाहन चलाने वालाें के लाइसेंस निलंबन का भी प्रावधान है। पुलिस से आरटीओ काे प्रस्ताव भेजे जाते हैं, लेकिन कार्रवाई कम ही हाेती है। 2018 में 1000 नशेड़ी वाहन चालकों के प्रकरण लाइसेंस निलंबन के लिए परिवहन कार्यालय को भेजे गए थे, लेकिन इनमें से 400 ही निलंबित किए गए। वहीं वर्ष 2019 में 400 प्रकरणों के विरुद्ध लाइसेंस निलंबन की 80 कार्रवाइयां हुईं। 2020, 2021 व 2022 में भी प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन लाइसेंस निलंबन की प्रक्रिया अटक कर रह गई।

इन तरीकाें से हो सकती है नशेड़ी की पहचान

वाॅक टेस्ट- 10 कदम सीधी लाइन पर चलाकर देखें। लड़खड़ाए ताे संदिग्ध। विजन टेस्ट- हाथ की अंगुली गिनवाकर पता कर सकते हैं। मेडिकल- खून की जांच से नशे की पुष्टि की जा सकती है। किसी वाहन से हादसा हाेने, तेज रफ्तार या फिर नशे में वाहन चलाने का संदेह हाेने पर ब्रीद एनालाइजर के अलावा इन 3 तरीकाें से भी वाहन चालक के नशे में हाेने की पहचान करने के लिए पुलिस काे अधिकार दिए गए हैं, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं करती।

एसपी ने कहा- नशे का संदेह हाेने पर मेडिकल भी कराते हैं
पुलिस अधीक्षक तरुण नायक का कहना है कि पुलिस के पास सिर्फ ब्रीद एनालाइजर मशीन ही है, जिससे तत्काल शराबी की पहचान हाे जाती है। अन्य तरह का नशा करने वाले की तत्काल पहचान ताे नहीं हाे पाती। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस काे कुछ टिप्स अपनाने के लिए कहा गया है। जब कभी काेई हादसा हाेता है ताे आराेपी ड्राइवर का मेडिकल कराया जाता है। इसमें भी नशे की पुष्टि हाे जाती है।

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