Chhattisgarh

टोल जांच में करोड़ों के अवैध स्पंज आयरन कारोबार का खुलासा, 106 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की जांच

महासमुंद, 16 मार्च।
जिले के बसना क्षेत्र में टोल जांच के दौरान दो ट्रकों की पड़ताल में करोड़ों रुपये के अवैध खनिज कारोबार और मिनरल चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में स्पंज आयरन की चोरी, फर्जी बिलिंग और हवाला लेन-देन से जुड़े एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में करीब 106 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध व्यापार और लेन-देन की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार 25 फरवरी 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ट्रक क्रमांक CG 04 JC 4585 और CG 07 AV 5290 के माध्यम से अवैध रूप से स्पंज आयरन का परिवहन किया जा रहा है। सूचना की तस्दीक के बाद पुलिस टीम ने दोनों ट्रकों को रोककर जांच की। ट्रक चालकों सोनूलाल मोंगरे और रामेश्वर मानिकपुरी से माल संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद पुलिस ने धारा 106 बीएनएसएस के तहत स्पंज आयरन को जब्त कर लिया।

आगे की जांच में पता चला कि आरोपी रंजीत सिंह (45 वर्ष), निवासी लोहराचट्टी थाना सोहेला जिला बरगढ़, ओडिशा द्वारा अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से विभिन्न ट्रकों से चोरी किए गए स्पंज आयरन को अवैध रूप से संग्रहित किया जाता था और कूट रचित बिलों के जरिए उसे लोहराचट्टी से रायपुर के उरला क्षेत्र तक परिवहन कराया जाता था।

इस मामले में थाना बसना में अपराध क्रमांक 84/26 के तहत धारा 318(4), 316(4), 317(2), 336(2), 338, 340 और 3(5) बीएनएस के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर पुलिस ने सोनूलाल मोंगरे, रामेश्वर मानिकपुरी और रंजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ और जब्त दस्तावेजों के अवलोकन में यह भी सामने आया कि रायगढ़ की एक इस्पात कंपनी के संचालक तारक घोष और उनके सहयोगियों द्वारा फर्जी बिल उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस ने जांच के बाद गढ़उमरिया, पुसौर (जिला रायगढ़) स्थित इस्पात फर्म में तस्दीक की, जहां फर्म की गतिविधियों में संचालक की संलिप्तता पाए जाने पर तारक घोष (56 वर्ष), निवासी शांति विहार कॉलोनी, माझापारा रैताराई जिला रायगढ़ को 8 मार्च 2026 को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मासिक वेतन पर कार्यरत तीन कामगारों के नाम पर शेल कंपनियां बनाकर फर्जी इनवॉइसिंग की जाती थी। बड़े उद्योगों के नाम से इनवॉइस तैयार किए जाते थे, जबकि वास्तविकता में चोरी और अवैध भंडारण के माध्यम से स्पंज आयरन का परिवहन किया जाता था।

इसके अलावा मामले में करोड़ों रुपये के हवाला लेन-देन के भी प्रमाण मिल रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दायरे में कई अन्य कंपनियां और नए आरोपी भी आ सकते हैं।

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित कर मामले के अन्य पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

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