जाको राखें साईंया: बंदर ने मां की गोद से छीनी 20 दिन की बच्ची, कुएं में फेंका, डायपर और नर्स की सूझबूझ से बची नन्ही जान

जांजगीर-चांपा। जिले के नैला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिवनी में मंगलवार दोपहर एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां एक बंदर ने मां की गोद में बैठी महज 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को छीन लिया और उसे पास ही स्थित कुएं में फेंक दिया। यह घटना कुछ ही पलों में पूरे गांव को सकते में डाल गई। गनीमत यह रही कि बच्ची ने डायपर पहन रखा था, जो पानी में उसके लिए किसी लाइफ जैकेट की तरह साबित हुआ। वहीं गांव में मौजूद एक नर्स की तत्परता और ग्रामीणों की सूझबूझ से मासूम की जान बच सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सिवनी, नैला निवासी अरविंद राठौर की पत्नी घर के आंगन में अपनी 20 दिन की बेटी को गोद में लेकर खाना खिला रही थी। इसी दौरान अचानक एक बंदर वहां आ पहुंचा और देखते ही देखते बच्ची को मां की गोद से छीनकर भाग निकला। बच्ची के छिनते ही मां जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज सुनकर घर के अन्य सदस्य और आसपास के ग्रामीण तुरंत बाहर आए और बंदर का पीछा शुरू कर दिया।
बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा। करीब 10 से 15 मिनट तक गांव में हड़कंप मचा रहा, लेकिन बच्ची कहीं नजर नहीं आई। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों की नजर पास के एक कुएं पर पड़ी, जहां बच्ची पानी में तैरती हुई दिखाई दी। बताया गया कि बच्ची लगभग 10 मिनट तक कुएं के पानी में रही और इस दौरान उसने काफी पानी भी पी लिया था। डायपर पहनने के कारण वह पूरी तरह पानी में नहीं डूबी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ग्रामीणों ने तत्काल बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला। उसी समय गांव में कथा सुनने आई नर्स राजेश्वरी राठौर भी मौके पर मौजूद थीं। उन्होंने बिना एक पल गंवाए बच्ची को सीपीआर देना शुरू किया। नर्स की त्वरित कार्रवाई और ग्रामीणों की मदद से कुछ ही देर में मासूम की सांसें लौटने लगीं। यह दृश्य देखकर परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं और सभी ने राहत की सांस ली।
प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर है और उसे किसी गंभीर चोट का खतरा नहीं है।
बच्ची के पिता अरविंद राठौर ने बताया कि वह मड़वा पावर प्लांट में कार्यरत हैं और घटना के समय ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि 20 दिन पहले ही उनके घर में बेटी का जन्म हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे यह भयावह घटना घट गई। उन्होंने कहा कि अगर बच्ची ने डायपर नहीं पहन रखा होता और गांव में नर्स मौजूद नहीं होती, तो अनहोनी हो सकती थी।
अरविंद राठौर ने यह भी बताया कि गांव में बंदर अक्सर दिखाई देते हैं, लेकिन इस तरह की खतरनाक घटना पहली बार हुई है। उन्होंने इसे सभी के लिए चेतावनी बताते हुए कहा कि छोटे बच्चों को कभी भी अकेला या असुरक्षित न छोड़ें। उन्होंने ग्रामीणों और नर्स राजेश्वरी राठौर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मदद मिलने से उनकी बेटी की जान बच सकी।
यह घटना न सिर्फ एक चमत्कारिक बचाव की कहानी है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है, जिससे सभी को सतर्क रहने की आवश्यकता है।




