छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण, मंगल सिंह सांडिया को महीनों के इंतजार से मिली मुक्ति

- सेवा संकल्प अभियान: ऑटोम्यूटेशन सुविधा से आसान हुई जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में पंजीयन सेवाओं में हो रहे सुधार
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए महीनों तक इंतजार करने की परेशानी अब तकनीक आधारित व्यवस्था से दूर हो रही है। पंजीयन विभाग की ऑटोम्यूटेशन सुविधा से रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल रही है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटकखर्रा, पोस्ट लालपुर निवासी मंगल सिंह सांडिया को भी इस नई व्यवस्था का लाभ मिला है। पहले जहां नामांतरण के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं इस बार रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका काम पूरा हो गया।
सेवा संकल्प अभियान के तहत मंगल सिंह सांडिया ने पंजीयन विभाग के साथ अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि ऑटोम्यूटेशन सुविधा से न केवल उनका समय बचा, बल्कि नामांतरण के लिए बार-बार तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। उन्होंने इस व्यवस्था को आम नागरिकों के लिए उपयोगी बताते हुए खुशी जाहिर की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पंजीयन सेवाओं में सुधार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के विजन के अनुरूप प्रदेश में पंजीयन सेवाओं को सरल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए जा रहे इन सुधारों का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाकर आम लोगों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
इसी दिशा में संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ नामांतरण की प्रक्रिया को जोड़ने वाली ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो रही है। इस सुविधा से रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है, जिससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और लंबी कार्यालयीन प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम होती है।
ऑटोम्यूटेशन से बच रहा समय, कार्यालयों के चक्कर भी कम
पहले जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए लोगों को अलग से राजस्व विभाग की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। कई मामलों में इस काम में महीनों लग जाते थे। इससे जमीन से जुड़े दूसरे कार्यों को पूरा करने में भी देरी होती थी।
नई तकनीक आधारित व्यवस्था से रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया के बीच समन्वय बेहतर हो रहा है। इसका फायदा विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भूमि स्वामियों को मिल सकता है, जिन्हें छोटे-छोटे सरकारी कार्यों के लिए भी तहसील और राजस्व कार्यालयों तक जाना पड़ता था।
मंगल सिंह सांडिया के मामले में रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण पूरा होना इस व्यवस्था के व्यावहारिक लाभ को दर्शाता है। इससे सरकारी कामकाज में समय की बचत के साथ प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल रही है।
मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के प्रति जताया आभार
नामांतरण की प्रक्रिया जल्दी पूरी होने पर मंगल सिंह सांडिया ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहले नामांतरण के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस बार रजिस्ट्री के तुरंत बाद काम पूरा होने से उन्हें बड़ी राहत मिली।
उनका अनुभव बताता है कि डिजिटल और तकनीक आधारित सरकारी सेवाओं का लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंच सकता है। ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था से जमीन की रजिस्ट्री के बाद होने वाली प्रक्रिया को आसान बनाने और लोगों की अनावश्यक दौड़भाग कम करने की दिशा में मदद मिल रही है।
सेवा संकल्प अभियान में सामने आ रही सुशासन की कहानियां
सेवा संकल्प अभियान के तहत पंजीयन विभाग हितग्राहियों से संवाद कर सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों के जमीनी प्रभाव को सामने ला रहा है। इसके माध्यम से नागरिकों के अनुभव और सुझाव भी संकलित किए जा रहे हैं, ताकि सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मंगल सिंह सांडिया की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए महीनों इंतजार करने के बजाय तुरंत काम पूरा होने से उन्हें राहत मिली। ऑटोम्यूटेशन जैसी तकनीक आधारित पहल से सरकारी सेवाओं को सरल बनाने, नागरिकों का समय बचाने और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।




