छठ पूजा पर ट्रेनों में टिकट का संकट, कन्फर्म बर्थ के लिए यात्रियों को करना पड़ रहा संघर्ष

0.पूर्वांचल जाने वालों की बढ़ी परेशानी, तीन ट्रेनें चलने के बावजूद नहीं मिल रही राहत, स्लीपर से लेकर एसी कोच तक लंबी वेटिंग
कोरबा। पूर्वांचल का महापर्व छठ पूजा 13 से 16 नवंबर तक मनाया जाएगा। इस महापर्व में शामिल होने के लिए कोरबा जिले में निवासरत पूर्वांचल के लोगों ने अपने गृहग्राम जाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। कोई परिवार के साथ छठ पूजा मनाने जाना चाहता है तो कोई चार दिनों तक अपने परिवार और रिश्तेदारों के बीच रहकर पर्व की खुशियां साझा करने की योजना बना रहा है। लेकिन त्योहार से पहले ही रेल यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या कन्फर्म टिकट की उपलब्धता को लेकर खड़ी हो गई है। कोरबा से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग के चलते यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
कोरबा रेल मार्ग पर इस रूट के लिए तीन प्रमुख ट्रेनें संचालित होने के बावजूद यात्रियों का दबाव कम नहीं हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी बिहार और झारखंड जाने वाले यात्रियों को उठानी पड़ रही है। बिलासपुर से पटना जाने वाली साउथ बिहार एक्सप्रेस में भी स्लीपर श्रेणी में लंबी प्रतीक्षा सूची चल रही है। स्थिति यह है कि कई यात्रियों को यात्रा की तारीख नजदीक आने के बावजूद कन्फर्म बर्थ मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। सबसे ज्यादा दबाव 12 नवंबर को यात्रा करने वाले यात्रियों का है। बड़ी संख्या में लोग इसी तारीख को अपने गृहग्राम पहुंचना चाहते हैं, ताकि छठ पूजा की तैयारियों में परिवार के साथ शामिल हो सकें।
साउथ बिहार एक्सप्रेस के अलावा सारनाथ एक्सप्रेस और गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस में भी सीटों की उपलब्धता बेहद सीमित है। सारनाथ एक्सप्रेस में 12 से 15 दिसंबर तक की उपलब्धता देखने पर स्लीपर श्रेणी में छपरा जाने के लिए 83 से 70 तक वेटिंग बताई गई है। वहीं वाराणसी तक की यात्रा करने वाले यात्रियों की वेटिंग सूची 103 तक पहुंच चुकी है। थर्ड एसी में छपरा जाने के लिए 56 और वाराणसी जाने के लिए टिकट लेने पर 74 से अधिक वेटिंग मिल रही है।
साउथ बिहार एक्सप्रेस में बिलासपुर से पटना जाने वाले यात्रियों को स्लीपर कोच में 94 से अधिक वेटिंग मिल रही है, जबकि थर्ड एसी में टिकट लेने वालों को 148 वेटिंग के बाद की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस में बिलासपुर से वाराणसी की यात्रा के लिए 12 नवंबर को स्लीपर श्रेणी में 115 वेटिंग के बाद टिकट मिलने की स्थिति है। सेकंड एसी में 119 और थर्ड एसी में 73 वेटिंग बताई गई है। इन ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना यात्रियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
कोरबा को मिनी भारत के नाम से जाना जाता है। यहां देश के अलग-अलग राज्यों के लोग रोजगार और अन्य कारणों से आकर बसे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के लोगों की संख्या काफी अधिक है। छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में ये लोग अपने परिवार के साथ गृहग्राम जाते हैं। कई परिवार ऐसे हैं जो सालभर इस महापर्व का इंतजार करते हैं। ऐसे में त्योहार के समय ट्रेनों में जगह नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है।
यात्रियों की एक और बड़ी समस्या यह है कि कोरबा से बिलासपुर की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। कई ट्रेनों की टिकट उपलब्धता और यात्रा के विकल्पों के लिए यात्रियों को बिलासपुर पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके चलते उन्हें पहले सड़क मार्ग से बिलासपुर पहुंचना पड़ता है और फिर वहां से ट्रेन पकड़नी होती है। इस अतिरिक्त सफर से समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
पूर्वांचल जाने वाले यात्रियों के लिए सारनाथ एक्सप्रेस, गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस, साउथ बिहार एक्सप्रेस और नेताजी एक्सप्रेस प्रमुख विकल्प हैं, लेकिन त्योहार के दौरान इन ट्रेनों में भी भारी भीड़ रहती है। यात्रियों का कहना है कि छठ पूजा जैसे बड़े पर्व के अवसर पर रेलवे को यात्रियों की संख्या को देखते हुए विशेष ट्रेनों का संचालन करना चाहिए। साथ ही नियमित ट्रेनों में अतिरिक्त स्लीपर और एसी कोच लगाए जाने चाहिए, ताकि लोगों को समय पर कन्फर्म बर्थ मिल सके और वे परिवार के साथ छठ महापर्व मनाने अपने घर पहुंच सकें।




