Chhattisgarh

कोरबा में मतदाता सूची से 1566 नाम काटने की सूची वायरल, अल्पसंख्यक समुदाय में रोष

कोरबा। लोकतंत्र की बुनियाद माने जाने वाले मताधिकार को लेकर कोरबा विधानसभा क्षेत्र में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य की मतदाता सूची 2025 के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के दौरान कथित रूप से 1566 मतदाताओं के नाम विलोपित किए जाने की सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने से हड़कंप मच गया है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया है।

गुरुवार को मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर कड़ा विरोध जताते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी के नाम अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।

समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि वायरल सूची में शामिल अधिकांश मतदाता कोरबा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों में निवासरत हैं और लंबे समय से मतदान करते आ रहे हैं। आरोप है कि कुछ अज्ञात लोगों द्वारा फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर थोक में झूठी आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जिनमें यह दर्शाया गया कि संबंधित मतदाता क्षेत्र में निवास नहीं करते या स्थानांतरित हो चुके हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास प्रतीत होता है। समाज के नेताओं ने सवाल उठाया कि जब बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया था, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में नाम काटने की शिकायतें अचानक कैसे सामने आईं।

अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल ने आवेदन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि सभी मामलों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भौतिक सत्यापन और विधिसम्मत प्रक्रिया के बिना किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि फॉर्म-7 जमा करने वालों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही जांच पूर्ण होने तक किसी भी मतदाता का नाम विलोपित न करने की मांग की गई है।

इस घटना के बाद से शहर के अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में असंतोष का माहौल है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की जांच प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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