कोरबा में ध्वनि प्रदूषण के नियमों की उड़ रही धज्जियां, रात 11:30 बजे तक गूंज रहे डीजे

रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर प्रतिबंध, तेज आवाज से आम नागरिक परेशान; नियमों का पालन कराने प्रशासन से कार्रवाई की मांग
कोरबा,16 अक्टूबर 2026। जिले में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और आम नागरिकों की सुविधा के लिए निर्धारित नियमों की खुलेआम अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। डीजे और साउंड सिस्टम संचालकों द्वारा निर्धारित समय-सीमा का उल्लंघन करते हुए रात 11 से 11:30 बजे तक तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से ध्वनि प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है, तो देर रात तक तेज आवाज में संगीत बजाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणालियों के इस्तेमाल के लिए निर्धारित प्रावधान हैं। सामान्य परिस्थितियों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि प्रणालियों के उपयोग पर प्रतिबंध रहता है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमित अवसरों पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से कुछ छूट दी जा सकती है। इसके अलावा, ध्वनि की तीव्रता निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना भी आवश्यक है।
इसके बावजूद जिले में कई आयोजनों के दौरान इन नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। रात के समय फुल साउंड में बजने वाले डीजे से आसपास के रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। देर रात तक तेज आवाज के कारण बच्चों की पढ़ाई, बुजुर्गों के आराम और बीमार लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है। कामकाजी लोगों को भी अगले दिन अपनी दिनचर्या में परेशानी होती है।
ध्वनि प्रदूषण से संबंधित नियमों का उद्देश्य धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि आयोजनों के दौरान आम नागरिकों के अधिकारों और स्वास्थ्य का ध्यान रखना है। ऐसे में आयोजकों और डीजे संचालकों से नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
अब आवश्यकता है कि पुलिस और जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाने की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करे। संवेदनशील और रिहायशी इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ ध्वनि की तीव्रता की जांच की जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने के साथ ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने में भी मदद मिलेगी।




