कोरबा एनडीपीएस मामले में 5 साल बाद पेश हुआ अभियोग पत्र, कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने से किया इनकार

कोरबा। कोरबा के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने थाना कोतवाली के अपराध क्रमांक 594/2021 से जुड़े एनडीपीएस एक्ट के मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायालय ने आरोपी ओमप्रकाश के विरुद्ध अपराध का संज्ञान लेने का उचित आधार नहीं पाए जाने पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। साथ ही आरोपी के विरुद्ध कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया गया है।
मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत दर्ज किया गया था। न्यायालय के आदेश के अनुसार, इस प्रकरण में अभियोग पत्र करीब पांच वर्ष बाद प्रस्तुत किया गया। अभियोग पत्र पेश करने में हुई देरी और विवेचना की कार्यप्रणाली को न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।
आदेश में तत्कालीन विवेचना अधिकारी और तत्कालीन थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन नहीं किया गया। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि गंभीर प्रकृति के मामले में विधि द्वारा निर्धारित समयावधि और आवश्यक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर अपेक्षित सावधानी नहीं बरती गई।
न्यायालय ने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं है। विधि के प्रावधानों का पालन करते हुए निर्धारित समयावधि में अभियोग पत्र प्रस्तुत करना तथा प्रकरण के विचारण तक आवश्यक कार्रवाई करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है।
न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली को विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए विचारणीय मानते हुए आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक, कोरबा को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा पुलिस महानिदेशक, रायपुर को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया गया है।
प्रकरण में आरोपी ओमप्रकाश की ओर से अधिवक्ता एवं लीगल एड डिफेन्स काउंसिल, कोरबा के प्रमोद तिवारी ने पैरवी की।




