कोयला कामगारों की पेंशन स्थिरता पर दिल्ली में बैठक, यूनियनों ने सीआईएल से एकमुश्त फंड देने की मांग उठाई

0.पेंशन फंड मजबूत करने और अंतिम कामगार तक भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर; बीएमएस प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय
नई दिल्ली। कोयला कामगारों को निर्बाध पेंशन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) से पेंशन फंड में एकमुश्त राशि देने की मांग यूनियन प्रतिनिधियों ने उठाई है। यह मांग पेंशन स्थिरता सब-कमेटी की बैठक में रखी गई, जो गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता कोयला मंत्रालय की एडिशनल सेक्रेटरी एवं सब-कमेटी की अध्यक्ष रुपिंदर बरार ने की।
बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों और सीएमओएआई (CMOAI) के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोयला कामगारों की पेंशन योजना वर्ष 1998 में शुरू हुई थी, लेकिन 1998 से 2017 तक लगभग 19 वर्षों तक कोल इंडिया द्वारा पेंशन फंड में कोई अंशदान नहीं दिया गया। प्रतिनिधियों ने कहा कि अंतिम कामगार तक पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करना सीआईएल की जिम्मेदारी है, इसलिए पेंशन फंड को मजबूत करने के लिए कंपनी को एकमुश्त राशि जमा करनी चाहिए।
इस पर सीआईएल के निदेशक (मानव संसाधन) डॉ. विनय रंजन ने बताया कि वर्तमान में सीआईएल पेंशन फंड में 7 प्रतिशत अंशदान के साथ प्रति टन कोयला उत्पादन पर 20 रुपये सहयोग राशि के रूप में दे रही है। हालांकि यूनियन प्रतिनिधियों का कहना था कि पेंशन फंड की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए यह पर्याप्त नहीं है और एकमुश्त बड़ी राशि जमा करना जरूरी है।
बैठक के दौरान पेंशन की स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन भी दिया गया। इसमें 60 माह के औसत वेतन के आधार पर पेंशन की गणना और अधिकतम पेंशन पर सीलिंग जैसे प्रस्ताव शामिल थे, जिन्हें यूनियन प्रतिनिधियों ने अस्वीकार कर दिया।
एडिशनल सेक्रेटरी रुपिंदर बरार ने आश्वासन दिया कि वे पेंशन योजना में केंद्र सरकार के अंशदान को बढ़ाने के लिए सरकार से चर्चा करेंगी। बैठक में सीएमपीएफओ के प्रशासनिक फंड के 3 प्रतिशत में से 0.72 प्रतिशत राशि पेंशन फंड में देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही केंद्र सरकार से 15,000 रुपये की सीमा पर 1.16 प्रतिशत अंशदान देने का आग्रह करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में सीएमपीएफओ के प्रभारी कमिश्नर सजिश कुमार एन, सीआईएल के निदेशक (एचआर) डॉ. विनय रंजन, सिंगरेनी के निदेशक (वित्त), ईपीएफओ के एडिशनल सीपीएफसी (पेंशन) अपराजिता जग्गी, डीडी रामनंदन (सीटू), डीएन सिंह (सीएमओएआई) सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
बीएमएस के प्रतिनिधि रहे अनुपस्थित जानकारी के अनुसार पेंशन स्थिरता सब-कमेटी में सीएमपीएफओ के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (BOT) में शामिल सभी यूनियन प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है। बीओटी में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के के.एल. रेड्डी और आशीष मूर्ति सदस्य हैं, लेकिन दोनों इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए। बताया जा रहा है कि श्री रेड्डी अब तक पेंशन स्थिरता सब-कमेटी की किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए हैं, जबकि श्री मूर्ति कुछ बैठकों में शामिल हुए थे।
इतनी महत्वपूर्ण बैठक में बीएमएस प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। वहीं एटक के रमेंद्र कुमार अस्वस्थ होने के बावजूद वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े, जबकि एचएमएस के राकेश कुमार पारिवारिक शोक के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके। बीएमएस प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारणों की आधिकारिक जानकारी फिलहाल नहीं मिल सकी है। जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।




