कुसमुंडा खदान में हादसा: भारी वाहन की चपेट में आए श्रमिक की मौत, परिजन को नौकरी और ₹5 लाख की सहायता

कोरबा। एसईसीएल की मेगा परियोजना कुसमुंडा खदान में गुरुवार को हुए एक सड़क हादसे में खदान में कार्यरत श्रमिक की मौत हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और स्थानीय ग्रामीणों, श्रमिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों ने सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया। बाद में एसईसीएल प्रबंधन द्वारा मृतक के परिजन को नौकरी और तत्काल ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।
जानकारी के अनुसार, कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी एसईसीएल के बिलासपुर मुख्यालय के अधीन संचालित कुसमुंडा परियोजना क्षेत्र में सतर्कता चौक के पास ग्राम जपेली निवासी 48 वर्षीय बहारता उर्फ दीवान दास भारी वाहन की चपेट में आ गए। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए कुसमुंडा अस्पताल के शवगृह में रखा गया।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रमिक संगठन के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खदान क्षेत्र में भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। उनका कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की गई होती तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था।
प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को रोजगार तथा अन्य सभी वैधानिक सुविधाएं देने की मांग की। बढ़ते विरोध को देखते हुए एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। लंबी वार्ता के बाद प्रबंधन ने मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने तथा तत्काल ₹5 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके अलावा दुर्घटना बीमा और नियमानुसार मिलने वाले अन्य मुआवजे एवं लाभ प्रदान करने का भी आश्वासन दिया।
एसईसीएल प्रबंधन के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। कुसमुंडा थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी की लापरवाही रही या नहीं।
धरना-प्रदर्शन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश संगठन मंत्री उमागोपाल, जिला संयोजक अतुल दास महंत, श्रम सेवा भू-स्थापित कामगार संगठन के संस्थापक अशोक पटेल, कुसमुंडा खदान अध्यक्ष कैलाश साहू, पीड़ित परिवार के सदस्य पवन दास महंत सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण और श्रमिक मौजूद रहे।




