एसईसीएल दीपका के कांटाघर के पास कोल लिफ्टर के मुंशी को वाहन ने कुचला, मौत

कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के दीपका एरिया में पिछली रात हुई दुर्घटना में कोल लिफ्टर के मुंशी अरविंद सिंह की मौत हो गई। यूपी के फतेहपुर निवासी अरविंद काफी समय से यहां पर रहकर काम कर रहा था। उसे एक भारी वाहन ने अपनी चपेट में ले लिया। घटना स्थल को लेकर परस्पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। दीपका पुलिस ने सूचना पर मर्ग पंचनामा किया है। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
दीपका पुलिस थाना क्षेत्रांतर्गत सिरकी रेलवे क्रासिंग के नजदीक यह एक्सीडेंट पिछली रात 8.30 बजे के लगभग होने की जानकारी मिली। कोल लिफ्टर बृजेश सिंह की सूचना पर पुलिस ने बीएनएसएस के तहत मर्ग दर्ज किया है। बताया गया कि एसईसीएल दीपका ने बृजेश एक ट्रांसपोर्टर के लिए कोल लिफ्टर के तौर पर नियोजित है, उसने ट्रांसपोर्टिंग के मामले में कामकाज देखने के लिए 32 वर्षीय अरविंद सिंह को मुंशी की भूमिका में रखा था। बताया गया कि रात्रि को मृतक अरविंद घर से पैदल ही सिरकी में 22 नंबर कांटा के पास जा रहा था। इसी दरम्यान पांडेय रोड लाइन्स के भारी वाहन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। ऐसा क्यों हुआ, इसका पता नहीं चला। वाहन के संपर्क में आने से अरविंद गिर पड़ा और उसके उपर से पहिए पार हो गए। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना प्राप्त होने पर पुलिस ने इस मामले में संज्ञान लिया। पंचनामा के बाद अगली कार्यवाही की गई। मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। एसईसीएल प्रबंधन का दावा है कि घटना माइनिंग एरिया से बाहर हुई है जबकि जो सूचनाएं पुलिस के पास पहुंची है उसमें घटना को खनन क्षेत्र के दायरे में होना बताया गया है। तथ्यों के आधार पर प्रकरण में आवश्यक जांच-पड़ताल और कार्यवाही करने की बात कही जा रही है। इन सबके बावजूद अरविंद की मौत से उसके परिजनों के सामने सामाजिक संरक्षण की चुनौतियां पैदा हो गई है।
लगातार हो रही घटना ने प्रबंधन को डाला परेशानी में
कोरबा जिले में एसईसीएल की मेगा माइंस के तौर पर गेवरा, दीपका और कुसमुंडा का नाम शामिल है। विस्तार के क्रम में कोल इंडिया ने यहां के लिए करोड़ों के संसाधन मुहैया कराए हैं। इसके साथ ही जरूरी मैनपावर की उपलब्धता कराई है। उन तमाम अवरोध को दूर किया जा रहा है जिसके कारण परियोजनाओं के विस्तार में दिक्कत है। सरकार के साथ समन्वय बनाने का काम भी इस कड़ी में चल रहा है। इन सबके बावजूद खदानों में लगातार हो रही दुर्घटनाएं अधिकारियों के लिए टेंशन का कारण बनी हुई है। ये कम कैसे हों, अब इस पर चिंतन चल रहा है।



