Chhattisgarh

एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र में खानों में इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर के सुरक्षित उपयोग पर कार्यशाला आयोजित

कोरबा, 22 फरवरी । South Eastern Coalfields Limited के ऊर्जा क्लब, कुसमुंडा क्षेत्र में “खानों में इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर के सुरक्षित उपयोग” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला श्री मुकेश कुमार सिन्हा, डीएमएस, बिलासपुर क्षेत्र क्रमांक–01 के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

कार्यक्रम को निदेशक (तकनीकी संचालन), एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, एसईसीएल का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस अवसर पर महाप्रबंधक (एस एंड आर), महाप्रबंधक (उत्पादन) एसईसीएल मुख्यालय, क्षेत्रीय महाप्रबंधक (कुसमुंडा, गेवरा, दीपका एवं कोरबा क्षेत्र) तथा महाप्रबंधक (संचालन), कुसमुंडा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों के खान प्रबंधक, क्षेत्रीय सुरक्षा अधिकारी, सुरक्षा अधिकारी, ब्लास्टिंग अधिकारी एवं उनकी टीमें, वरिष्ठ अधिकारी तथा सुपरवाइजर उपस्थित रहे।

विस्फोटक निर्माण कंपनियों—Solar Industries India Limited, Ideal Explosives, CTET Explosives तथा RIPL Explosives—के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। एसईसीएल के अन्य कई क्षेत्रों ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यशाला ने खान प्रबंधन, ब्लास्टिंग विशेषज्ञों, सुरक्षा अधिकारियों एवं निर्माताओं के बीच सुरक्षित ब्लास्टिंग पद्धतियों, परिचालन चुनौतियों तथा इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेशन प्रणालियों में तकनीकी उन्नति पर सार्थक विचार-विमर्श का मंच प्रदान किया। चर्चा के दौरान प्रणाली के घटक, संभावित जोखिम, फील्ड विफलताएं, परीक्षण प्रक्रियाएं, प्री-ब्लास्ट निरीक्षण, मिसफायर रोकथाम, ब्लास्ट डिज़ाइन अनुकूलन तथा सुरक्षा प्रबंधन योजना में जोखिम आकलन जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया।

विस्तृत विश्लेषण के आधार पर यह सिफारिश की गई कि इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेशन प्रणाली में उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरण डीजीएमएस अनुमोदित हों तथा वैधानिक सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए। फील्ड समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु निर्माता द्वारा तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करने, सुरक्षित हैंडलिंग, परिवहन एवं भंडारण, सर्किट डिज़ाइन एवं डिले प्रोग्रामिंग के सत्यापन, प्री-ब्लास्ट परीक्षण, दोष पहचान तथा प्रणाली डायग्नोस्टिक्स को अनिवार्य बनाए जाने पर बल दिया गया। साथ ही, ब्लास्टर्स एवं ब्लास्टिंग दल के नियमित प्रशिक्षण, क्षमता विकास तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के एकरूप अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया।
यह कार्यशाला सुरक्षित, कुशल एवं विश्वसनीय ब्लास्टिंग संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।

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