अमित शाह बोले- नक्सल हिंसा पीड़ितों को सम्मानपूर्ण जीवन देना संकल्प, नक्सलमुक्त बस्तर को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी सरकार

रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पांच दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है।
अमित शाह गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संचालित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए।
दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय शिविर के माध्यम से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं। शिविर का आयोजन भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के दौरान आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने हाथ-पैर गंवाए हैं। ऐसे लोगों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सहायता का कार्य नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और उनका आत्मविश्वास लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में 5 से 7 अक्टूबर तक आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे, जिनमें 1,570 से अधिक बस्तर क्षेत्र के थे।
अमित शाह ने नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 को इनामी राशि और 7,882 को प्रोत्साहन राशि दी गई। इसके अलावा 455 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया, 129 को भूमि आवंटित की गई और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास दिए गए। लगभग 2,308 लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
उन्होंने घोषणा की कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 500 से अधिक सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय लोगों को सरकारी सेवाएं, प्रशिक्षण और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, दूरसंचार और रोजगार सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक विकास योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं। 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली सुविधाओं का विस्तार हुआ है तथा 431 स्कूल खोले गए हैं। सेवा डेरों में सिलाई-कढ़ाई, इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर में कृषि, पशुपालन और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार भी सरकार की प्राथमिकता है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने और उसके पुनर्वास के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों ने कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण मिलने से जीवन में आए बदलावों के अनुभव साझा किए। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों को गतिशीलता, आत्मविश्वास और सम्मानपूर्ण जीवन के अवसर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।




