कोरबा में खरीदी लिमिट घटने से धान खरीदी अभियान सुस्त, टोकन नहीं कटने से किसान परेशान, सरकार की नीयत पर उठे सवाल

कोरबा, 27 दिसंबर। किसानों का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर खरीदने का वादा कर सत्ता में आई साय सरकार के लिए इस वर्ष का धान खरीदी अभियान कोरबा जिले में चुनौतीपूर्ण होता नजर आ रहा है। समिति स्तर पर प्रतिदिन धान खरीदी की लिमिट बीते वर्ष की तुलना में आधे से भी कम किए जाने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। खासकर सीमांत और बड़े किसानों के ऑफलाइन टोकन अपेक्षित रूप से नहीं कट पा रहे हैं, जिससे वे समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि आकांक्षी जिला कोरबा पहली बार धान खरीदी के तय लक्ष्य से पीछे चलता दिखाई दे रहा है।
जिले के लिए 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन 26 दिसंबर तक महज 8 लाख 78 हजार 145 क्विंटल धान की ही खरीदी हो सकी है। इस स्थिति में शेष बचे 24 खरीदी कार्यदिवसों में लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रतिदिन औसतन 93 हजार 395 क्विंटल धान की खरीदी करनी होगी, जो मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए बेहद कठिन प्रतीत हो रहा है। कई उपार्जन केंद्रों में कम लिमिट के कारण टोकन नहीं कटने से किसान नाराज हैं और शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत 14 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। सरकार द्वारा 2300 रुपए समर्थन मूल्य के साथ 800 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा से किसानों में उत्साह तो है, लेकिन एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, त्रुटिपूर्ण गिरदावरी और बिक्री रकबे में कटौती जैसी तकनीकी समस्याओं ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। अब समिति स्तर पर प्रतिदिन खरीदी की लिमिट कम किए जाने से हालात और बिगड़ गए हैं।
पड़ताल में करतला और कोरबा ब्रांच के कई उपार्जन केंद्रों में किसान असंतोष जताते नजर आए। बरपाली ब्रांच के फरसवानी, सोहागपुर, कराईनारा, पठियापाली, चिकनीपाली, तुमान और कोरबा ब्रांच के तिलकेजा उपार्जन केंद्रों में लिमिट कम होने से किसान टोकन कटवाने से वंचित रहे। कई किसान निराश होकर वापस लौटे और उन्होंने खुलकर व्यवस्था की आलोचना की। समिति के कर्मचारियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि लिमिट बढ़ाने के लिए मांग पत्र भेजे गए थे, लेकिन जो संशोधन हुआ वह वास्तविक आवश्यकता से काफी कम है, जिससे खरीदी की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
नियमानुसार 70 प्रतिशत टोकन ‘टोकन तुंहर हाथ’ ऐप से और 30 प्रतिशत समिति स्तर पर काटे जा रहे हैं। समिति स्तर की लिमिट कम होने से 2 से 10 एकड़ वाले सीमांत किसानों और 10 एकड़ से अधिक रकबा रखने वाले बड़े किसानों के टोकन नहीं कट पा रहे हैं। छोटे किसानों को सिंगल टोकन मिलने से दिक्कत कम है, लेकिन अन्य वर्ग के किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।
फरसवानी उपार्जन केंद्र में जहां पिछले वर्ष प्रतिदिन 1500 क्विंटल की लिमिट थी, वहीं इस वर्ष बढ़ोतरी के बाद भी लिमिट केवल 1200 क्विंटल ही रखी गई है। 53 हजार क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले यहां अब तक केवल 14 हजार 862 क्विंटल धान की खरीदी हो पाई है। सोहागपुर और कराईनारा में भी यही हालात हैं। कराईनारा में 1200 क्विंटल की मांग के बावजूद लिमिट 800 क्विंटल तय की गई, जिससे किसान नाराज हैं। पठियापाली में भी टोकन कटवाने पहुंचे किसान निराश लौटे और लिमिट 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 1500 क्विंटल करने की मांग की।
तिलकेजा उपार्जन केंद्र में स्थिति और भी गंभीर है, जहां महज 1000 क्विंटल की लिमिट होने से दूर-दराज से आए किसानों को टोकन नहीं मिल सका। प्रतिवर्ष सैकड़ों क्विंटल धान बेचने वाले किसान भी इस अव्यवस्था से आहत नजर आए।
दूसरी ओर, खरीदे गए धान के उठाव में भी मार्कफेड की सुस्ती सामने आ रही है। जिले के उपार्जन केंद्रों में अभी भी 2 लाख 94 हजार 875 क्विंटल धान उठाव के इंतजार में पड़ा है, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य और बोनस मिलाकर 91 करोड़ रुपए से अधिक है। नौ उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से ज्यादा धान जाम है। हाथी प्रभावित क्षेत्रों के केंद्रों में भी समय पर उठाव नहीं होने से कर्मचारियों को कड़ाके की ठंड और संभावित खतरों के बीच धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
किसानों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक समिति स्तर पर खरीदी लिमिट नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक टोकन कटना संभव नहीं है और सरकार का लक्ष्य अधूरा ही रह जाएगा। वहीं जिला खाद्य अधिकारी ऋतुराज देवांगन का कहना है कि मांग आने पर खरीदी लिमिट बढ़ाई जाएगी और धान उठाव को प्राथमिकता दी जा रही है। बावजूद इसके जमीनी हकीकत यह है कि लिमिट की पेंच में फंसा धान खरीदी अभियान कोरबा जिले को तय लक्ष्य से काफी पीछे धकेलता नजर आ रहा है।




